किसी भी जांच के लिए तैयार, पहले अकाली अपने गुनाहों की जांच कराएं : सुखजिन्दर सिंह रंधावा

किसी भी जांच के लिए तैयार, पहले अकाली अपने गुनाहों की जांच कराएं : सुखजिन्दर सिंह रंधावा

चंडीगढ़/ सहकारिता और जेल मंत्री सरदार सुखजिन्दर सिंह रंधावा ने कहा कि वह सचिवालय स्टाफ के अपने पूर्व निजी सचिव बचित्तर सिंह से सम्बन्धित किसी भी जांच का सामना करने के लिए तैयार हैं। इसके साथ ही उन्होंने अकालियों को चुनौती देते हुये कहा कि उन पर उंगली उठाने से पहले अपने दशक के कार्यकाल के दौरान किये गुनाहों की स्वैच्छा से जांच करवाने के लिए आगे आना चाहि

आज यहां जारी एक बयान में स. रंधावा ने कहा कि उनके खिलाफ उठाने के लिए कोई मुद्दा न मिलने पर अकाली घटिया हत्थकंडे अपना रहे हैं और सरकार द्वारा उनके साथ लगाऐ गए पूर्व निजी सचिव के बहाने लोगों को गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि बचित्तर सिंह, जो कि मंत्रियों के स्टाफ में आते हैं, को उनके साथ लगाया गया था जोकि उनके निजी स्टाफ में नहीं थे।

उन्होंने कहा कि इस मामले पर बयानबाजी करने वाले अकाली नेता डा. दलजीत सिंह चीमा खुद कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं जिस कारण सचिवालय स्टाफ की पोस्टिंग के बारे वह अच्छी तरह अवगत है परन्तु फिर भी वह राजनैतिक रोटियाँ सेकने का कोई मौका नहीं खोना चाहते। स. रंधावा ने कहा कि तथ्य यह है कि बचित्तर सिंह की बतौर निजी सचिव इस साल 3 मार्च को उनके स्टाफ में से बदली हो गई थी।

सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह शर्मनाक बात है कि अकालियों ने यह जानते हुए भी कि यह पूरी तरह बेबुनियाद मुद्दा है, तथ्यों की जांच किये बिना इस मामले को बेवजह तूल देते हुये अपनी राजनैतिक ड्रामेबाजी शुरू कर दी।

रंधावा ने यह भी स्पष्ट किया कि जब उन्होंने पूर्व निजी सचिव का मामला मीडिया में पढ़ा तो उन्होंने स्वयं डायरैक्टर, ब्यूरो आफ इन्वेस्टिगेशन, पंजाब को फोन करके इस मामले में कार्यवाही करने और उनकी तरफ से पूरा सहयोग देने की बात कही गई। स. रंधावा ने कहा, ‘‘तीन दशकों से अधिक समय के अपने पूरे राजनैतिक जीवन में मैं पारदर्शी, जवाबदेही और ईमानदारी वाले सार्वजनिक जीवन का समर्थक रहा हूं और मैंने इन सिद्धांतों को किसी भी पद की अपेक्षा ज्यादा संजो कर रखा हैं। इसलिए मैं इस मामले सम्बन्धी किसी भी तरह की जांच के लिए तैयार हूँ क्योंकि इससे मेरा कुछ लेना देना नहीं है।’’

अकाली लीडरशिप पर निशाना साधते हुये सहकारिता मंत्री ने उनको 2007-2017 के दशक लम्बे शासन की कुरीतियों के बारे स्पष्टीकरण देने के लिए चुनौती दी। स. रंधावा ने उनको इस शासन के दौरान अपने गुनाहों की जांच के लिए स्वैच्छा से करवाने के लिए कहा जब भ्रष्टाचार, भाई-भतीजावाद, नियमों को ताक पर रखना शिखर पर थे। उन्होंने कहा कि पूरा पंजाब जानता है कि कैसे अकालियों ने सरकारी खजाने को खुलेआम लूटा है और उनकी शर्मनाक बात है कि उन्होंने अपनी अंतरात्मा में झांकने की बजाय उनके विरुद्ध एक शर्मनाक प्रचार किया है।

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