लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता समानता से बनती है, चयनात्मकता से नहीं

गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसे सबसे अधिक क्षति उसके घोषित शत्रुओं से नहीं, बल्कि उसके घोषित रक्षकों से भी

यदि इस्लाम समानता की बात करता है तो मुस्लिम प्रश्नल लॉ बोर्ड पसमंदा मुसलमानों के प्रति उदासीनता क्यों?

डॉ. हसन जमालपुरी बात छोटी है लेकिन बात बड़ी भी है। इस्लाम हमें समानता का अधिकार देता है लेकिन भारत में कुछ ऐसी मुस्लिम ऑटोनोमश

अमृत काल में लैंगिक समानता पर विमर्श जरूरी

डॉ. वेदप्रकाश देश आजादी के अमृत काल में प्रवेश कर चुका है, ऐसे में लैंगिक समता चिंता और चिंतन का विषय होना चाहिए। हाल ही

समाज में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में मीडिया की भूमिका अहम : नफीसा

पटना/ समाज में जेंडर इक्विालिटी (लैंगिक समानता) को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी बनानेवाले से लेकर परिवार के सदस्यों तक सबकी बराबर की जिम्मेदारी है।

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