“मिर्ज़ापुर भइल गुलज़ार …. ” – एक कजरी में छिपी सांस्कृतिक विरासत, विरह, गिरमिटिया संघर्ष और सभ्यता की उदासी

गौतम चौधरी भारतीय लोकजीवन में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो केवल गाए नहीं जाते, बल्कि पीढ़ियों तक एक समाज की स्मृति बनकर जीवित रहते

Translate »