संस्कृति और संस्कार : समाज या व्यक्ति का स्वरूप ही नहीं संसाधन व पूंजी भी है

गौतम चौधरी हमारे समय की एक बड़ी विडंबना यह है कि संस्कृति पर चर्चा तो बहुत होती है लेकिन संस्कृति को समझने का प्रयास कम

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