भयानक रहस्य/ एक अभिशप्त अंगूठी की कहानी, बहुमूल्य होने के बाद भी जिसका कोई खरीदार नहीं 

भयानक रहस्य/ एक अभिशप्त अंगूठी की कहानी, बहुमूल्य होने के बाद भी जिसका कोई खरीदार नहीं 

डॉ. राकेश गर्ग

अमेरिका के विख्यात नगर लास ऐंजिल्स के एक प्रमुख बैंक के लाकर में एक स्वर्णिम रत्न जड़ित बेहद खूबसूरत व आकर्षक मगर अद्भुत अंगूठी वर्षों से लावारिस की भांति बन्द पड़ी है। अंगूठी स्वामी चाहकर भी अंगूठी पहनने से कतराता है।

पुलिस कई बार उसकी नीलामी की घोषणा कर चुकी है मगर दर्शकों के भारी संख्या में आने के बावजूद कोई भी अंगूठी को खरीदने का साहस नहीं जुटा पाता। अंगूठी का इतिहास जानते ही खरीदार उससे ऐसे मुंह फेर लेते हैं मानो साक्षात मौत के दर्शन कर रहे हों ।

लाकर में बन्द इस खूबसूरत अंगूठी के साथ मौत का साया घूमता है, ऐसा विश्वास अंगूठी के एक दर्जन से अधिक पूर्व प्रेमियों के अकाल काल का ग्रास बनने के बाद पैदा हुआ है। इस अंगूठी के प्रमुख चाहने वालों का इतिहास लाकर में एक डायरी में लिखा हुआ है जिसके अनुसार अंगूठी के इतिहास की कहानी की शुरूआत आज से 68 वर्ष पूर्व शुरू हुई।

सन् 1920 में हालीवुड के तत्कालीन सर्वाधिक ख्याति प्राप्त अभिनेता रूडोल्फ वैलेंतीमो ने इस अंगूठी को पहली बार पहना था। रूडोल्फ ने इस अंगूठी को सान फ्रांसिस्को के जाने माने जौहरी की दुकान पर देखा था। न जाने इस अंगूठी ने उन पर क्या जादू किया कि रूडोल्फ ने मुंहमांगी कीमत देकर अंगूठी को तुरन्त खरीदकर उंगली में धारण कर लिया।

रूडोल्फ की उन दिनों हालीवुड में सर्वाधिक चर्चित व युवा अभिनेता के रूप में धाक थी। उसका नाम मानो बाक्स आफिस पर सफलता की गारन्टी थी किन्तु रूडोल्फ ने अंगूठी क्या पहनी मानो असफलता का दामन थाम लिया और सफलता उनसे किनारा कर गयी। उन दिनों रूडोल्फ ’’दियंग रोजा‘‘ नामक फिल्म में अभिनय कर रहा था जिसमें उसने चर्चित अंगूठी धारण कर रखी थी।

यह फिल्म रूडोल्फ की ही नहीं बल्कि हालीवुड की सर्वाधिक असफलतम फिल्म साबित हुई। इस फिल्म की भयंकर असफलता ने रूडोल्फ की इमेज को शीशे की भांति चूर-चूर कर दिया। दो वर्षों तक उसे कोई ऐसी फिल्म नहीं मिली जिससे उसको पूर्ववत सफलता मिल पाती।

आखिर रूडोल्फ ने अपने कुछ मित्रों के कहने पर एक दिन वह अंगूठी उंगली से उतार ही दी। अंगूठी के उंगली से उतरते ही मानो उसकी गर्दिश के दिन टल गये। सफलता उसके चरण चूमने लगी। एक के बाद एक उसकी सभी फिल्में हिट होती गयी और उसने पुनः लोकप्रियता के उच्चतम शिखर को पा लिया।

इसके बावजूद रूडोल्फ इसे मात्र संयोग ही मानता रहा और उसने सन् 1926 में फिर अपनी फिल्म ’सन आफ दि सेके‘ में वह अंगूठी पहन ली। फिल्म पूर्ण होने के कुछ दिन बाद वह हंसी खुशी एक उच्चस्तरीय दावत में शामिल हुआ मगर यह दावत उसके जीवन की अन्तिम दावत बनकर रह गयी। रूडोल्फ ने वहां अत्यधिक शराब पी। इसी दौरान उसके पेट में अत्यधिक तेज दर्द उठा और वह बेहोश होकर गिर पड़ा। उसे तुरन्त अस्पताल पहुंचाया गया, जहां रूडोल्फ अपनी फिल्म ’सन आफ दि सेके‘ के रिलीज होने से पूर्व पन्द्रह दिन जिन्दगी व मौत के बीच चले संघर्ष के बाद मौत के आगोश में समा गया।

दो सप्ताह के अस्पताल प्रवास के दौरान उसके लाख चाहने वालों के अलावा मित्र व सम्बन्धी उससे बराबर मिलते रहे। रूडोल्फ के मित्रों में उसकी कई सफलतम फिल्मों की नायिका ’पोला नेग्री‘ भी थी। अस्पताल में मृत्यु के पूर्व वह अंगूठी रूडोल्फ ने नेग्री को भेंट कर दी। नेग्री ने बड़े सम्मान के साथ अंगूठी को अपनी अंगुली में धारण कर लिया।      एक सप्ताह बाद ही नेग्री अस्वस्थ होकर अस्पताल जा पहुंची जहां से एक साल बाद उसका मृत शरीर ही बाहर आ पाया। अमेरिका के अनेक चिकित्सकों व विशेषज्ञों ने बीमारी के दौरान नेग्री के विभिन्न जांच पड़ताल व परीक्षण किये मगर अंत तक वे उसके रोग का निर्णय नहीं कर पाये।

काल की साक्षात अवतार उस अंगूठी का शिकार केवल फिल्मी हस्तियां ही नहीं, अन्य लोग भी हुए। हुआ यह कि बीमारी के दौरान अपने परिचित से मिलने आने वाला रेस कोलम्बो नामक व्यक्ति नेग्री से भी मिलने जुलने लगा तथा उसका मित्र बन गया। मृत्यु से पूर्व नेग्री ने अपने मित्र को यही रहस्यमय अंगूठी भेंट कर दी। रेस ने बड़ी खुशी से वह अंगूठी पहनी मगर इसके पांचवें ही दिन वह एक मोटर दुर्घटना में मारा गया और इसके साथ ही अंगूठी के नाम एक और मौत जुड़ गयी।

इस अंगूठी के मनहूस होने की चर्चा अब धीरे-धीरे होने लगी थी। रेस की मृत्यु के बाद उसके मित्रा कैसिनो ने अंगूठी लेकर अपने पास उसका प्रभाव देखने के लिये रख ली मगर जब कोई माह तक उसके साथ कोई अनहोनी नहीं घटित हुई तो उसने संयोग मानकर अंगूठी धारण कर ली। उंगली में आने के एक सप्ताह के अन्दर-अन्दर अंगूठी ने अपना करिश्मा दिखा दिया और बेचारा कैसिनो एक सड़क दुर्घटना का शिकार हो गया।

अब तक यह अंगूठी अपनी मनहूसियत के कारण बहुचर्चित हो चुकी थी। समाचार पत्रों में इस अंगूठी के रहस्य की जानकारी जन साधारण तक जा पहुंची। लोग उसे पहनने से डरने लगे थे किन्तु कैसिनो का भाई डेल इस तरह की बातों पर विश्वास नहीं करता था। अंधविश्वासों, भूत प्रेतों और अंगूठी को मौत का डर स्वीकारने से इंकार करते हुए डेल ने अंगूठी को अपने पास रख लिया।

अपने प्रियजनों के भारी अनुनय विनय के बाद ही डेल उंगली में अंगूठी पहनने के स्थान पर रखने को तैयार हुआ था। एक रात डेल के घर में चोरी हो गई। इस चोरी में अपराधी चोर एक पुलिस कांस्टेबिल के हाथों मारा गया। वास्तव में पुलिसकर्मी विलीज नामक इस चोर को मारना नहीं चाहता था। केवल घायल करके भागने से रोकना भर चाहता था किन्तु दुर्भाग्यवश विलीज का पैर फिसल गया और टांग में लगने के स्थान पर सीने में जा लगी। विलीज घटनास्थल पर ही ढेर हो गया।

उसकी तलाशी में अन्य सामान के अलावा वह मनहूस अंगूठी भी मिली जो उसने अपनी अंगुली में पहन रखी थी। इसी के साथ अंगूठी से जुड़ी मौतों में एक मौत और बढ़ गई। अनेक लोगों ने इस मौत पर अपनी टिप्पणी व्यक्त करते हुए कहा कि-यदि विलीज ने यह खूनी अंगूठी न पहनी होती तो शायद गोली उसे न लगती और अकाल मौत का शिकार होने से अवश्य बच जाता।

इस दुर्घटना के बाद पुलिस ने इस मनहूस व खूनी अंगूठी को अपने पास रख लिया मगर विधि को यह मंजूर न था। उसने तो अंगूठी के नाम एक और मौत लिखी थी। कुछ महीनों बाद विख्यात अभिनेता और अंगूठी के पहले शिकार रूडोल्फ वैलंतीमो के ऊपर बन रही फिल्म के हीरो हैरी की मृत्यु के बाद पुलिस ने यह मौत की साक्षात अवतार खूनी अंगूठी बैंक लाकर में रख दी। इसी के साथ-साथ अंगूठी की मनहूसियत की दास्तान लिखी एक डायरी भी लाकर में रख दी गई मगर अब कोई उसे पहनने का दुस्साहस नहीं कर पाता।

(अदिति)

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