समावेशी शासन की प्राथमिकता को हमें समझना होगा

समावेशी शासन की प्राथमिकता को हमें समझना होगा

लोकतांत्रिक शासकीय प्रणाली में “अधिकतम सहभागिता“ के सिद्धांत की सरकार होती है। इस शासकीय व्यवस्था में, “सबका साथ, सबका विकास एवं सबका विश्वास” के अखंड, एकनिष्ठ पुरुषार्थ के साथ दूरदर्शी, लोकोपयोगी एवं लोकसहभागिता के मापांकों को पूरा करते हुए प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी अपनी हर नीति, हर निर्णय एवं शासकीय कार्रवाई में “भारत पहले” के शासकीय संकल्प पर प्राथमिकता से कार्य कर रहे हैं।

सरकार ने ‘गरीबों एवं वंचितों’ के कल्याण के लिए काम करने, मध्यम वर्ग के मूलभूत भौतिक उन्नयन के लिए, महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए, किसान कल्याण की दिशा में कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए, देश के युवाओं के लिए शैक्षणिक एवं रोजगार के अवसरों के उन्नयन के लिए, सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने एवं भारत के हर क्षेत्र के विकास के लिए कृतसंकल्पित होकर काम किया है। मोदी जी ने “विकासात्मक प्रक्रिया” को पुरजोर गति प्रदान की है। सरकार ने पड़ोसी देशों के साथ शांति ,सहयोग, स्थिरता एवं सौहार्द की नीति को क्रियान्वित करने, वैश्विक पटल पर भारत को यथोचित सम्मान दिलाने, देश के भीतर उपद्रव उत्पन्न करने वाले दहशतगर्दों के लिए ‘त्वरित दंड की प्रक्रिया’ को सुनिश्चित करवाने एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने में अपने कार्यकाल के 12 साल पूरे कर लिए हैं। बारह सालों के समग्र मूल्यांकन से पता चलता है कि“ समावेशी शासन के द्वारा गरीबों एवं वंचितों के जीवन को सुखदायक, बेहतर एवं सुरक्षित किया जा रहा हैं।”

विगत 12 वर्षों में सार्वजनिक वितरण प्रणाली( पीडीएस) उत्कृष्टता के शिखर पर पहुंची है। सरकारी योजनाओं एवं आधारभूत संरचनात्मक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में एक “आदर्श परिवर्तन” देखा जा रहा है। दशकों से निलंबित आधारभूत परियोजनाओं के पूरा होने से लेकर बुनियादी मौलिक सुविधाएं मुहैया कराने तक, वर्तमान सरकार ने अपने शासकीय क्रियान्वयन में बदलाव किए हैं। मोदी सरकार ने विभिन्न उपेक्षित समूहों के लिए सशक्तिकरण सुनिश्चित किया है, जिससे उनको सामाजिक सुरक्षा कवच प्रदान करके ‘आत्मनिर्भर ‘ बनने में सहयोग मिला है। सरकार ने हमेशा यह सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिया है कि, “बुनियादी मौलिक सुविधाओं से कोई वंचित न हो।”

सरकार ने सदैव यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया है कि, “ विकास की प्रक्रिया में सभी की पूर्ण सहभागिता हो।” शासकीय योजनाओं एवं कल्याणकारी योजनाओं का वितरण “समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचे।” व्यक्तियों को सामाजिक एवं आर्थिक सशक्तिकरण के लिए बुनियादी मौलिक सुविधाओं तक पहुंच हो सकें। 12 वर्षों की मजबूत, स्थिर एवं शासकीय नीतियों के प्रति शासकीय व्यवस्था के द्वारा कल्याणकारी योजनाओं की परिपूर्णता शत – प्रतिशत हो रही है। “सुशासन एवं जातिविहीन शासकीय संरचना परिपूर्णता की नीति को सफल बना रही है।”

सुशासन से प्राप्त “परिपूर्णता व्यापक क्षेत्र में भेदभाव एवं भ्रष्टाचार की राजनीति को समाप्त कर रही है।” बैंकिंग, शौचालय, नल से जल, एलपीजी सिलेंडर, विद्युत उपभोक्ताओं की संख्या एवं स्वास्थ्य जैसी बुनियादी मौलिक सुविधाएं सभी को प्राप्त हो रही हैं। 31मई 2026 तक नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन आफ इंडिया (एनपीसीआई) के आंकड़ों के अनुसार यूपीआई ने 23.2 बिलियन( 2320 करोड़) लेनदेन का ‘एतिहासिक रिकॉर्ड’ बनाया है। जन- धन खातों की संख्या 57 करोड़ तक पहुंच गई है। ’स्वच्छ भारत मिशन’ के तहत 31 मई ,2026 तक व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों की संख्या 12 करोड़ से अधिक हो चुकी है। 31 मई ,2026 तक एलपीजी कनेक्शन की संख्या 34 करोड़ हो चुकी है।

मोदी जी की मजबूत इच्छा शक्ति एवं अनथक प्रयासों से मौलिक सुविधाएं “सभी” को प्राप्त हो रहे हैं। इस सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि लोगों को बुनियादी मौलिक सुविधाएं धर्म ,जाति ,क्षेत्र ,आर्थिक स्थिति एवं राजनीतिक पसंद के आधार पर करने के बजाय प्रत्येक “आवश्यक हकदार” को योजनाओं का जमीनी लाभ मिले। इन कल्याणकारी योजनाओं की महनीय उपादेयता है कि 24.82 करोड़ लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं। इनकी उपादेयता के कारण लोगों के स्वास्थ्य, शिक्षा एवं मौलिक जीवन स्तर का उन्नयन हो रहा है।

जन- धन योजना, आधार एवं प्रत्यक्ष हस्तांतरण से करोड़ों लोगों को वित्तीय प्रणाली से जोड़ा गया है जिससे कैंसर रूपी भ्रष्टाचार की बीमारी पर नियंत्रण का प्रयास किया गया है। आयुष्मान योजना से 50 करोड़ से अधिक लोगों को ‘ स्वास्थ्य बीमा’ की सुरक्षा मिली है। इन योजनाओं से प्रमाणित होता है कि “ भारत का विकास सशक्तिकरण एवं समानता के मूल्य पर आधारित है।” इन सभी बहुआयामी कार्यक्रमों से भारत वैश्विक स्तर की ‘चौथी अर्थव्यवस्था’ की ओर अग्रसर है। यह उज्ज्वल भारत की ओर बढ़ता कदम है । इन सभी कारकों की उपस्थिति एवं सहयोग से “भारत भविष्य की महाशक्ति का उद्घोष है।”

सरकार ने ‘स्टार्टअप इंडिया योजना’ एवं ‘स्टैंड अप इंडिया योजना’ के द्वारा “गरीबों एवं वंचितों को मुख्यधारा” में लाने का सफल प्रयास किया है। मोदी सरकार ने अपनी विभिन्न योजनाओं के माध्यम से पंक्ति में खड़े अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसे भी “ संबल” प्रदान करने का प्रयास किया है । सरकार ने आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों को आरक्षण देकर गरीब सवर्णों के शैक्षणिक एवं भौतिक स्तर का उन्नयन किया है। यह “ गरीब सवर्णों के लिए ऐतिहासिक निर्णय है।” इसकी इन परिवारों को अत्यधिक आवश्यकता थी।

आंकड़ों एवं तथ्यों से स्पष्ट है कि वर्तमान सरकार समावेशी शासन की दिशा के लिए “ बड़ा” सोच रही हैं। विगत बारह सालों के दौरान करोड़ों आवश्यक परिवारों को पहली बार “मूलभूत बुनियादी सुविधाएं” प्रदान की गई हैं, जिससे इन परिवारों के भौतिक जीवन का गुणात्मक उन्नयन हो रहा है। समाज के सभी वर्गों विशेषकर पिछड़ों एवं दलितों को “सत्ता” में आनुपातिक सहभागिता दी जा रही है। वर्तमान सरकार के मंत्रिपरिषद में पिछड़े एवं दलितों का प्रतिनिधित्व 60 प्रतिशत है। सरकार की शासकीय स्थिरता सभी वर्गों की सहभागिता से होती है। महिलाओं, किसानों , गरीबों , दलितों एवं अल्पसंख्यकों की आर्थिक मजबूती के लिए शासकीय योजनाओं का क्रियान्वयन इन वर्गों तक किया जा रहा है। सरकार ने अनेक जनहितकारी योजनाओं की धनराशि सीधे जन- धन खातों में हस्तांतरित कर उनका आर्थिक उन्नयन किया है। बिना किसी भेदभाव के सभी वर्ग लाभान्वित हुए हैं।

मोदी सरकार के अनथक प्रयासों, मजबूत इच्छा शक्ति एवं प्रशासकीय क्षमता से “सभी भारतीयों में प्रसन्नता की भावना आ रही हैं।” ‘पीएम गरीब कल्याण योजना’ के अंतर्गत 81.7 5 लोगों को मुक्त अनाज प्रदान किया गया हैं। ‘नल से जल कनेक्शन’ से 15 करोड़ परिवारों को ‘ स्वच्छ एवं पेयजल ‘ प्राप्त हो रहा है, जिससे उनके जीवन में घातक बीमारियों एवं संक्रमित बीमारियों से निजात मिल रही है। मोदी सरकार ने ‘ पीएम स्व निधि’ से लोन प्रदान किया है, जो उनके जीवन में भौतिक सुख ,संतुष्टि एवं उनके जीवन में गुणात्मक सुख प्रदान किया है। सरकार की अनेक लोकहितैशियोजनाएं वर्तमान में हर अभावग्रस्त का मान ,सम्मान एवं स्वाभिमान बढ़ा रही है। “भौतिक चेतना की उत्क्रांती ही वास्तविक विकास है।” सामयिक में भारत की 64 प्रतिशत आबादी यानी 95 करोड़ लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजना का लाभ मिल रहा हैं।

पिछले बारह सालों में सरकार के अनथक प्रयास से भारतीय संस्कृति, भारतीय विरासत एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के मूल्यों को “उचित मान्यता “प्राप्त हुआ है,एवं दुनिया भर में भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत एवं ऐतिहासिक विरासत को उन्नयन किया जा रहा है। सरकार के प्रयासों से कल्याण से लेकर संस्कृति तक, व्यापार के सुगम पहुंच से राष्ट्रीय सुरक्षा तक, आर्थिक विकास से लेकर जीवनयापन की सुगमता तक चहुमुखी विकास हो रहा हैं।सरकार के प्रयासों से भारत वैश्विक स्तर पर उभरती महाशक्ति, उदीयमान आर्थिक विकास वाला राष्ट्र – राज्य,सामरिक क्षेत्र में ताकतवर शक्ति एवं घरेलू स्तर पर आत्मनिर्भर भारत बन रहा है। विकास की गति, लोकतांत्रिक स्तर पर लोगों की प्रसन्नता एवं सामरिक स्तर पर सफलता ३३३.. “विकसित भारत/2047” की सफलता के नींव को मजबूती दे रहा है।

मेरा सुझाव है कि समावेशी शासकीय नीतियों से ही भारत ‘सबसे बड़े लोकतंत्र’ के साथ-साथ विश्व का ‘वृहद सर्वश्रेष्ठ लोकतंत्र’ बन सकता है. समावेशी शासन के द्वारा भारत की जनता लोकतंत्र एवं लोकतांत्रिक शासकीय संस्थाओं के प्रति संतोषजनक प्रसन्नता की अभिव्यक्ति कर सकती है. इन नीतियों के क्रियान्वयन से भारत “विकसित भारत/2047” के लक्ष्य को प्राप्त कर सकेगा. समावेशी शासकीय नीतियों के कारण राष्ट्रीय आपदा एवं राष्ट्रीय सुरक्षा के वातावरण में सभी राजनीतिक दल “एक स्वर” में सरकार के साथ खड़े हैं एवं समावेशी शासन के द्वारा “सबका साथ, सबका विकास एवं सबका विश्वास“ के एकनिष्ठ पुरुषार्थी मंत्र को सार्थक एवं प्रासंगिक किया जा सकता है।

लेखक सांसद एवं सामाजिक चिंतक हैं। आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। इससे हमारे प्रबंधन का कोई सरोकार नहीं है।

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