गौतम चौधरी
मार्च का महीना आमतौर पर गर्मी की दस्तक का समय माना जाता है, लेकिन इस वर्ष रांची सहित पूरे झारखंड और पूर्वी भारत में मौसम ने जिस तरह करवट ली है, उसने सामान्य जलवायु पैटर्न पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं। अचानक आई बारिश, तेज आंधी, ओलावृष्टि और तापमान में गिरावट- केवल मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि एक व्यापक जलवायु संकेत भी हो सकते हैं।
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि हाल के दिनों में झारखंड के कई जिलों में तेज हवाओं और बारिश ने जनजीवन को प्रभावित किया है। वज्रपात की घटनाओं में जानमाल की हानि भी हुई है, जो इस बदलते मौसम की गंभीरता को रेखांकित करती है। इधर मौसम विभाग ने कई क्षेत्रों में ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए 60-70 किमी/घंटा तक की तेज हवाओं और आंधी-तूफान की चेतावनी दी है।
दी आइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में बताया गया है कि यह बदलाव केवल झारखंड तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और ओडिशा सहित पूरे उत्तर एवं पूर्वी भारत में असामान्य वर्षा दर्ज की गई है, जिससे तापमान में 5 से 10 डिग्री तक की गिरावट देखी गई। स्पष्ट है कि यह एक व्यापक क्षेत्रीय मौसमीय घटना है, न कि कोई स्थानीय विचलन।
रांची स्थित मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, इस असामान्य मौसम के पीछे मुख्य कारण ’पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) और स्थानीय चक्रवाती परिसंचरण हैं। ये प्रणालियाँ नमी और ठंडी हवाओं को पूर्वी भारत तक खींच लाती हैं, जिससे – गरज-चमक के साथ बारिश होती है, तेज हवाएँ चलती हैं और तापमान में अचानक गिरावट आती है।
दी संडे गार्जियन की रिपोर्ट में बताया गया है कि मार्च जैसे संक्रमण काल में, जब सर्दी से गर्मी की ओर बदलाव होता है, ऐसे अस्थिर मौसम की संभावना बढ़ जाती है।
यह असामयिक वर्षा किसानों के लिए चिंता का कारण बन रही है। रबी फसलों पर इसका सीधा प्रभाव पड़ रहा है-कहीं ओलावृष्टि से नुकसान, तो कहीं तेज हवाओं से फसलें गिर रही हैं। साथ ही, वज्रपात और आंधी जैसी घटनाएँ ग्रामीण क्षेत्रों में जोखिम बढ़ा रही हैं। इस मामले में दी इकॉनोमिक टाइम्स लिखता है कि इसका एक सकारात्मक पक्ष भी है-भीषण गर्मी से अस्थायी राहत और वायु गुणवत्ता में सुधार, जैसा कि अन्य राज्यों में भी देखा गया।
बार-बार बदलते मौसम पैटर्न अब एक बड़े सवाल की ओर इशारा करते हैंकृक्या यह केवल मौसमी उतार-चढ़ाव है या जलवायु परिवर्तन का प्रभाव? इस मामले में विशेषज्ञों की राय बेहद चिंता पैदा करने वाली है। मामले के जानकार बताते हैं कि इससे मौसम की चरम घटनाएँ (extreme events) बढ़ रही हैं, वर्षा का वितरण अनियमित हो रहा है, पारंपरिक मौसम चक्र अस्थिर होता जा रहे हैं। ऐसे में, मार्च में इस तरह की सक्रिय वर्षा भविष्य के मौसमीय रुझानों की एक झलक हो सकती है।
मौसम विभाग की चेतावनियाँ केवल सूचना नहीं, बल्कि सतर्कता का संकेत हैं। खुले स्थानों से बचाव, बिजली गिरने के समय सावधानी और कृषि प्रबंधन-ये सभी अब आवश्यक हो गए हैं।
कुल मिलाकर, रांची और झारखंड में हो रही यह बारिश केवल मौसम का बदलाव नहीं, बल्कि प्रकृति का एक संदेश है। यह हमें याद दिलाती है कि हम एक ऐसे दौर में जी रहे हैं, जहाँ मौसम अब पहले जैसा “पूर्वानुमेय” नहीं रहा। प्रश्न यह नहीं है कि बारिश क्यों हो रही है-प्रश्न यह है कि क्या हम इस बदलते मौसम के साथ खुद को ढालने के लिए तैयार हैं?
