धान के MSP में मामूली बढ़ोतरी किसानों के साथ अन्याय : राजा वड़िंग

धान के MSP में मामूली बढ़ोतरी किसानों के साथ अन्याय : राजा वड़िंग

बोले— बढ़ती लागत के मुकाबले राहत नाकाफी, सरकार बताए आय दोगुनी करने का वादा कहाँ गया

चंडीगढ़/ पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष Amrinder Singh Raja Warring ने केंद्र सरकार द्वारा खरीफ सीजन 2026-27 के लिए धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में की गई बढ़ोतरी को किसानों के साथ “मज़ाक” करार देते हुए कहा कि यह फैसला खेती की वास्तविक लागत और किसानों की आर्थिक स्थिति से पूरी तरह कटा हुआ है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने MSP में केवल ₹72 प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर यह साबित कर दिया है कि उसे किसानों की परेशानियों और कृषि क्षेत्र के बढ़ते संकट का कोई अंदाजा नहीं है। वड़िंग ने आरोप लगाया कि लगातार बढ़ती महंगाई ने खेती को पहले ही घाटे का सौदा बना दिया है, लेकिन केंद्र सरकार कागजी आंकड़ों के सहारे किसानों को राहत देने का दावा कर रही है।

राजा वड़िंग ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में डीज़ल, खाद, कीटनाशक, बिजली, मजदूरी और कृषि मशीनरी के खर्च में भारी बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा खेतों की जुताई, बुवाई और सिंचाई पर आने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में MSP में मामूली वृद्धि किसानों के जख्मों पर मरहम नहीं, बल्कि नमक छिड़कने जैसा है।

उन्होंने कहा कि पंजाब देश का प्रमुख धान उत्पादक राज्य है और यहां की अर्थव्यवस्था बड़े स्तर पर कृषि पर निर्भर करती है। यदि किसानों को उनकी फसल का लाभकारी मूल्य नहीं मिलेगा, तो इसका असर केवल ग्रामीण अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि पूरे राज्य की आर्थिक गतिविधियों पर पड़ेगा।

वड़िंग ने सवाल उठाया कि जब खेती की लागत प्रति एकड़ हजारों रुपये तक बढ़ चुकी है, तब सरकार यह कैसे मान सकती है कि ₹72 की बढ़ोतरी किसानों को राहत दे पाएगी। उन्होंने कहा कि MSP की घोषणा केवल राजनीतिक औपचारिकता बनकर रह गई है, जबकि किसानों को वास्तविक लाभ नहीं मिल पा रहा।

उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi को किसानों की आय दोगुनी करने के पुराने वादे की याद दिलाते हुए कहा कि केंद्र सरकार को अब देश के किसानों को जवाब देना चाहिए कि वह वादा आखिर कहाँ खो गया। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आय बढ़ाने के बजाय उनकी लागत और कर्ज दोनों बढ़ते जा रहे हैं।

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष ने यह भी कहा कि यदि सरकार वास्तव में किसानों के हितों को लेकर गंभीर है, तो उसे कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) की सिफारिशों से आगे बढ़कर MSP तय करना चाहिए और किसानों को स्वामीनाथन आयोग के अनुसार लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करना चाहिए।

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो कृषि क्षेत्र का संकट और गहरा सकता है। वड़िंग ने केंद्र सरकार से MSP नीति की पुनः समीक्षा करने और किसानों को वास्तविक राहत देने की मांग की।

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