बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव, पूर्वी भारत पानी – पानी, 28 सितंबर तक के बारिश संकेत

बंगाल की खाड़ी में गहरा दबाव, पूर्वी भारत पानी – पानी, 28 सितंबर तक के बारिश संकेत

रांची/ बंगाल की खाड़ी में बना गहरा दबाव अब तटीय आंध्र प्रदेश को पार कर अंदरूनी भूभाग की ओर बढ़ गया है। भारत मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार यह मौसम तंत्र 23 सितंबर की रात आंध्र प्रदेश के कलिंगपट्टनम के निकट तट पार कर चुका है। इसके प्रभाव से झारखंड के राजधानी क्षेत्र रांची सहित ओडिशा, आंध्र प्रदेश और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हुई है। अब इसके पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में आगे बढ़ने के साथ इसका प्रभाव पूर्वी और मध्य भारत के कई हिस्सों में बारिश के रूप में दिखाई दे रहा है।

मौसम विभाग ने 24 सितंबर को बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में अत्यधिक भारी बारिश की संभावना जताई है। ओडिशा और पश्चिम बंगाल में भी बारिश का दौर जारी रहने का अनुमान है। मौजूदा मौसम तंत्र के कमजोर होने के बावजूद इसके साथ जुड़ी नमी और मानसूनी गतिविधियां पूर्वी भारत में अगले कई दिनों तक वर्षा का कारण बन सकती हैं।

झारखंड और बिहार में बारिश के आसार

झारखंड के लिए 24 सितंबर को विशेष रूप से भारी बारिश की चेतावनी महत्वपूर्ण है। मौसम तंत्र के आगे बढ़ने के साथ बारिश की तीव्रता में धीरे-धीरे कमी आने की संभावना है, हालांकि बादल और स्थानीय गरज-चमक के साथ वर्षा का सिलसिला बना रह सकता है।

बिहार में भी 24 और 25 सितंबर को बादल छाए रहने तथा बारिश की संभावना है। इसके बाद 26 से 28 सितंबर के बीच कई स्थानों पर हल्की से मध्यम बारिश या गरज-चमक के साथ बौछारें पड़ सकती हैं। बिहार के कुछ हिस्सों में 28 सितंबर को भारी बारिश की संभावना भी बनी हुई है।

ओडिशा में आज भी प्रभाव

ओडिशा इस मौसम तंत्र से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्यों में है। भुवनेश्वर-कटक क्षेत्र के IMD पूर्वानुमान में 24 सितंबर को भारी बारिश, गरज-चमक और 40–50 किलोमीटर प्रति घंटे की गति से तेज हवाओं की चेतावनी दी गई है। 25 सितंबर से बारिश की तीव्रता में कमी आने का अनुमान है, हालांकि 26 और 27 सितंबर को भी बारिश के दौर जारी रह सकते हैं।

पश्चिम बंगाल में भी सक्रिय रहेगा मौसम

पश्चिम बंगाल में भी 24 और 25 सितंबर को कई इलाकों में बारिश और गरज-चमक की संभावना है। उत्तर बंगाल के कुछ हिस्सों में 25 सितंबर तक भारी बारिश का असर देखा जा सकता है। इसके बाद बारिश की तीव्रता कम होने का अनुमान है, लेकिन वातावरण में पर्याप्त नमी रहने से स्थानीय वर्षा की संभावना बनी रहेगी। कूचबिहार के लिए IMD के स्थानीय पूर्वानुमान में 24 और 25 सितंबर को भारी बारिश तथा गरज-चमक के साथ तेज हवा की चेतावनी दी गई है।

26 से 28 सितंबर तक क्या रहेगा मौसम?

मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखें तो 26 सितंबर के बाद इस मौसम तंत्र का सीधा प्रभाव कमजोर पड़ने लगेगा। इसके बावजूद पूर्वी भारत में मानसूनी गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं होंगी।

26 सितंबर/ बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल के अनेक हिस्सों में बादल और हल्की से मध्यम बारिश की संभावना। कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ तेज बौछारें पड़ सकती हैं।

27 सितंबर/ बारिश की तीव्रता में और कमी आने के बावजूद पूर्वी भारत के कई हिस्सों में स्थानीय वर्षा जारी रहने की संभावना। पश्चिम बंगाल और ओडिशा में कुछ इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश हो सकती है।

28 सितंबर/ बिहार और झारखंड में स्थानीय बारिश की संभावना बनी रहेगी। पूर्वी उत्तर प्रदेश में भी बारिश की गतिविधि बढ़ सकती है। बंगाल और ओडिशा में मुख्य रूप से बादल और स्थानीय बौछारों की स्थिति रह सकती है। मौसम विभाग के विस्तारित पूर्वानुमान में 28 सितंबर तक पूर्वी भारत में वर्षा गतिविधि पूरी तरह समाप्त होने के संकेत नहीं हैं।

चक्रवात नहीं, गहरे दबाव का असर

इस पूरे घटनाक्रम में एक बात स्पष्ट करना जरूरी है। बंगाल की खाड़ी में बना यह सिस्टम चक्रवाती तूफान में परिवर्तित नहीं हुआ है। यह गहरे दबाव के रूप में तट पार कर चुका है और अब स्थल भाग में आगे बढ़ते हुए कमजोर हो रहा है। इसलिए आने वाले दिनों में मुख्य चिंता तेज हवाओं की बजाय भारी बारिश, स्थानीय जलभराव, नदियों और निचले इलाकों में पानी बढ़ने तथा कुछ स्थानों पर अचानक तेज वर्षा की है।

मौसम विशेषज्ञों के अनुसार सितंबर के अंतिम सप्ताह में मानसून की वापसी की प्रक्रिया शुरू होने से पहले बंगाल की खाड़ी में बनने वाले ऐसे मौसमी तंत्र पूर्वी और मध्य भारत में बारिश को सक्रिय कर सकते हैं। इस बार भी समुद्र से उठी नमी का प्रभाव तटीय ओडिशा और आंध्र प्रदेश से आगे बढ़कर छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और उत्तर भारत के कुछ हिस्सों तक पहुंच रहा है।

ऐसे में 28 सितंबर तक पूर्वी भारत में मौसम पूरी तरह शुष्क होने की संभावना कम है। हालांकि 24 सितंबर के बाद भारी बारिश की तीव्रता और क्षेत्र धीरे-धीरे सीमित होने की उम्मीद है। स्थानीय स्तर पर गरज-चमक और अचानक तेज बारिश की स्थिति बनी रह सकती है। IMD की ओर से जारी 24 सितंबर की सूचना में भी इस मौसम तंत्र के प्रभाव को विशेष रूप से रेखांकित किया गया है।

ताजा 24 सितंबर 2026 के IMD पूर्वानुमान को देखें तो अभी सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि समुद्र में बना गहरा दबाव अब स्थल पर आ चुका है और उसका प्रभाव बारिश के रूप में झारखंड और बिहार तक पहुंच रहा है। अगले 2–3 दिनों में इसका प्रभाव धीरे-धीरे कमजोर होगा, लेकिन बारिश और गरज-चमक पूरी तरह तुरंत खत्म नहीं होगी।

रांची में अभी स्थिति

रांची में पिछले 24 घंटे में 52 मिमी बारिश दर्ज की गई है। आज 24 सितंबर को IMD ने रांची के लिए भारी बारिश और अलग-अलग स्थानों पर बहुत भारी बारिश, साथ में गरज, बिजली और 40–50 किमी/घंटे की तेज हवा की चेतावनी दी है।

रांची, खूंटी, गुमला, सिमडेगा और पश्चिमी सिंहभूम में आज भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है। झारखंड प्रशासन ने बारिश के कारण झरनों और जलप्रपातों पर जाने वाले पर्यटकों के लिए भी सावधानी जारी की है।

रांची का आगे का पूर्वानुमान

इससे स्पष्ट है कि रांची में सबसे ज्यादा असर आज है। 25–26 सितंबर को सिस्टम कमजोर पड़ने के साथ बारिश की तीव्रता घटने की संभावना है।

पटना में क्या स्थिति है?

पटना में पिछले 24 घंटे में 18.1 मिमी बारिश दर्ज हुई है। आज मौसम सामान्यतः बादलयुक्त है और मध्यम बारिश का पूर्वानुमान है।

बिहार के लिए IMD ने 24 सितंबर को बहुत भारी बारिश, 25 और 26 सितंबर को भारी बारिश तथा गरज-बिजली की चेतावनी दी है। 27 सितंबर को मुख्य खतरा गरज-बिजली का है। 28 सितंबर से कोई विशेष चेतावनी नहीं है।

पटना का स्थानीय पूर्वानुमान भी इसी दिशा में है:

ओडिशा में असर पहले से दिखाई दे रहा है

यह मौसम तंत्र जिस रास्ते से आया है, वहाँ बारिश का प्रभाव अधिक है। भुवनेश्वर-कटक क्षेत्र में पिछले 24 घंटे में लगभग 49 मिमी बारिश दर्ज हुई और 24 सितंबर को भारी बारिश के साथ 40–50 किमी/घंटे की तेज हवा और गरज-बिजली की चेतावनी है। 25 सितंबर से वहां विशेष चेतावनी नहीं है, हालांकि 26–28 सितंबर तक स्थानीय बारिश जारी रह सकती है।

असली तस्वीर क्या बन रही है?

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