पुष्पांशु पांडेय
बिहार के विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक नियुक्ति हेतु प्रस्तावित नई नियमावली से अभ्यर्थीगण चिंतित हैं। इसी के दृष्टिगत बिहार के विभिन्न विश्वविद्यालय के अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ के अध्यक्ष व कार्यकारिणी की एक आपातकाल बैठक पटना में संपन्न हुई। जिसमें बिहार विश्वविद्यालयों में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति हेतु प्रस्तावित नई नियमावली पर गंभीर चिंता जताई गई। साथ ही कई महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए सरकार की गलत नीतियों के खिलाफ क्रांतिकारी मुहिम के तहत चरणबद्ध आंदोलन करने की तैयारी शुरू की गई।
इसी बैठक में अतिथि सहायक प्राध्यापक संघ की एकता जिंदाबाद का जयघोष करते हुए आंदोलन शुरू कर दिया गया है, जो गत एक सप्ताह से जारी है। बताया जाता है कि बिहार सरकार द्वारा सहायक प्राध्यापक नियुक्ति के लिए प्रस्तावित नई नियमावली/ड्राफ्ट को लेकर अभ्यर्थियों के बीच गंभीर चिंताएँ उत्पन्न हुई हैं। अभ्यर्थियों को आशंका है कि यदि नियुक्ति प्रक्रिया विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के प्रचलित नियमों एवं मानकों के अनुरूप नहीं होगी, तो इससे भर्ती प्रक्रिया की वैधानिकता पर प्रश्न उठ सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य विश्वविद्यालय सेवा आयोग (BSUSC) के मसौदे में यह उल्लेख है कि नियुक्तियाँ (UGC) के दिशा-निर्देशों के अनुसार की जाएँगी। ऐसे में यदि अंतिम नियमावली में न्ळब् मानकों से असंगत प्रावधान शामिल किए जाते हैं, तो इसके विरुद्ध न्यायालय में चुनौती दिए जाने की संभावना बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में बहुप्रतीक्षित सहायक प्राध्यापक भर्ती लंबे समय तक कानूनी विवाद में फँस सकती है, जिससे बिहार के हजारों योग्य अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित होगा।
प्राप्त जानकारी के मुताबिक, अभ्यर्थियों की प्रमुख माँगें निम्नलिखित हैं- 1. अंतिम नियमावली न्ळब् के लागू नियमों एवं मानकों के अनुरूप बनाई जाए। 2. भर्ती प्रक्रिया को कानूनी रूप से मजबूत एवं पारदर्शी बनाया जाए, ताकि भविष्य में अनावश्यक न्यायिक विवाद उत्पन्न न हों। 3. सभी अभ्यर्थियों को समान अवसर प्रदान करते हुए शीघ्र एवं निष्पक्ष तरीके से सहायक प्राध्यापक की रिक्तियों पर नियुक्ति की जाए। 4. राज्य सरकार एवं राजभवन अभ्यर्थियों की आशंकाओं पर विचार कर आवश्यक संशोधन करें, ताकि भर्ती प्रक्रिया समयबद्ध रूप से पूरी हो सके।
बिहार के युवा केवल समय पर, पारदर्शी और विधिसम्मत भर्ती चाहते हैं। सरकार से अपेक्षा है कि ऐसी नियमावली लागू की जाए जो (UGC) के मानकों के अनुरूप हो, न्यायिक कसौटी पर खरी उतरे और योग्य अभ्यर्थियों के हितों की रक्षा करे। इसी के मद्देनजर बिहार में सहायक प्राध्यापक भर्ती हेतु प्रस्तावित नई नियमावली पर अभ्यर्थियों की आपत्तियाँ एवं सुझाव दिए गए हैं।
बताया गया है कि सहायक प्राध्यापक भर्ती के लिए प्रस्तावित नई नियमावली के कुछ प्रावधानों को लेकर अभ्यर्थियों के बीच गंभीर चिंताएँ हैं। अभ्यर्थियों का मानना है कि इन बिंदुओं पर पुनर्विचार कर नियमावली को अधिक न्यायसंगत, पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण बनाया जा सकता है।
प्रस्तावित अधिकतम आयु सीमा 40 वर्ष रखी गई है। अभ्यर्थियों का मानना है कि आयु सीमा राज्य सरकार के अन्य शैक्षणिक एवं प्रतियोगी भर्ती नियमों तथा वास्तविक शैक्षणिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए निर्धारित की जानी चाहिए ताकि योग्य उम्मीदवार अवसर से वंचित न हों।
ड्राफ्ट में मैट्रिक एवं इंटरमीडिएट के अंकों को वेटेज देने का प्रावधान है। अभ्यर्थियों का तर्क है कि उच्च शिक्षा में सहायक प्राध्यापक की नियुक्ति का आधार मुख्य रूप से स्नातकोत्तर स्तर की शैक्षणिक उपलब्धियाँ, NET/JRF, PhD तथा शोध कार्य होना चाहिए। मैट्रिक एवं इंटर के वेटेज को समाप्त कर उच्च शैक्षणिक योग्यताओं को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए।
वर्तमान प्रस्ताव में PhD और NET/JRFके वेटेज के बीच अंतर अपेक्षाकृत कम है। जबकि PhD एक दीर्घकालिक शोध-आधारित डिग्री है, जिसके लिए वर्षों का अकादमिक एवं अनुसंधान कार्य आवश्यक होता है। इसलिए PhD को अधिक महत्व देते हुए उसका वेटेज बढ़ाकर 30 अंक किया जाना चाहिए, जिससे शोध संस्कृति को प्रोत्साहन मिले और उच्च गुणवत्ता वाले शोधार्थी अकादमिक क्षेत्र की ओर आकर्षित हों।
राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर की शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित शोध कार्य किसी भी शिक्षक की अकादमिक गुणवत्ता का महत्वपूर्ण संकेतक होता है। इसलिए शोध प्रकाशनों के लिए भी निर्धारित अंक दिए जाने चाहिए, ताकि गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान को प्रोत्साहन मिल सके।
अनुभव के लिए अलग से अंक देने के बजाय चयन प्रक्रिया में साक्षात्कार के माध्यम से उम्मीदवार की शिक्षण क्षमता एवं अनुभव का मूल्यांकन किया जा सकता है। अभ्यर्थियों की चिंता है कि अनुभव प्रमाणपत्रों की सत्यता को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। अतः अनुभव के लिए प्रत्यक्ष वेटेज समाप्त कर आवश्यकता होने पर साक्षात्कार में उसका मूल्यांकन किया जाए, जिससे चयन प्रक्रिया अधिक पारदर्शी एवं विवाद-मुक्त बन सके।
बता दें कि अभ्यर्थियों का उद्देश्य भर्ती प्रक्रिया का विरोध करना नहीं बल्कि इसे अधिक न्यायसंगत, गुणवत्तापूर्ण एवं कानूनी रूप से मजबूत बनाना है। सरकार एवं संबंधित प्राधिकारियों से अनुरोध है कि उपरोक्त सुझावों पर गंभीरता से विचार कर नियमावली में आवश्यक संशोधन करें ताकि योग्य अभ्यर्थियों को उचित अवसर मिल सके तथा भर्ती प्रक्रिया भविष्य में किसी कानूनी विवाद का विषय न बने। छात्र हैरत में हैं कि केंद्र में मोदी सरकार और राज्य में सम्राट सरकार के होने के बावजूद कुछ अधिकारियों अपने लोगों को उपकृत करने के रास्ते ढूंढ लिए हैं जिससे सैकड़ों वाजिब अभ्यर्थियों के हक मारे जाने की आशंका है। इस आशय की जानकारी गेस्ट टीचर संघ के सचिव आनंद आजाद ने दी है।
आलेख में व्यक्त विचार लेखक के निजी हैं। इससे जनलेख प्रबंधन का कोई सरोकार नहीं है।
