गाड़ी खरीदने के बजाय किराये की गाड़ी के प्रयोग के बहुआयामी लाभ

डॉ. शैलेश शुक्ला बीसवीं सदी ने दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि निजी कार आधुनिकता, समृद्धि और स्वतंत्रता का सबसे बड़ा प्रतीक है लेकिन इक्कीसवीं

डिजिटल संप्रभुता : जब राष्ट्र की आवाज़ निजी माध्यमों पर निर्भर हो जाए

गौतम चौधरी आधुनिक युद्ध अब केवल सीमाओं पर नहीं लड़े जा रहे हैं। वे सूचनाओं, संचार माध्यमों, एल्गोरिद्म और डिजिटल नेटवर्कों पर भी लड़े जाते

आइकॉनिक लुक वाली एक्‍ट्रेस, फरहाना भट्ट

सुभाष शिरढोनकर 15 मार्च, 1997 को श्रीनगर के एक मुस्लिम परिवार में पैदा हुई हिंदी फिल्मों, टेलीविजन और स्ट्रीमिंग प्लेटफॉर्म पर काम करने वाली एक्‍ट्रेस

विश्वास का संकट : मुख्यधारा की भारतीय मीडिया के सामने सबसे बड़ी चुनौती

गौतम चौधरी भारतीय लोकतंत्र का चौथा स्तंभ कहे जाने वाले मीडिया के सामने आज सबसे बड़ा संकट आर्थिक नहीं, तकनीकी भी नहीं, बल्कि विश्वास का

बाब अल-मंडेब पर हूतियों के पहरे से संकट में वैश्विक व्यापार

दुर्गेश्वर राय यमन के हूती विद्रोहियों ने सोमवार, 20 जुलाई को एक चौंकाने वाली घोषणा की। उन्होंने सऊदी अरब पर तत्काल प्रभाव से नौसैनिक नाकाबंदी

भारत की इंजीनियरिंग शिक्षा : संकट व रोजगार का भ्रम, डिग्रियों का कारखाना या प्रतिभा का निर्माण?

गौतम चौधरी भारत स्वयं को विश्व की सबसे युवा आबादी वाला देश कहता है। हर वर्ष लाखों विद्यार्थी इंजीनियर बनने का सपना लेकर कॉलेजों में

प्रवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा की अपील आर्थिक मजबूती या रणनीति का हिस्सा?

गौतम चौधरी हाल ही में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवासी भारतीयों से भारत में अधिक निवेश और विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने का आह्वान किया।

लाखों करोड़ बचाने का गेम प्लान, गढ़ा जा रहा स्वावलम्बी राष्ट्र का खाका

डॉ. मत्स्येन्द्र प्रभाकर भारत सरकार का ध्यान कोई 1,272 विदेशी उत्पादों के आयात को कम करने की एक श्महायोजनाश् पर जमा है। इसके जरिये लगभग

चंपावत : उत्तराखंड का वह अनमोल पर्यटन रत्न, जहाँ प्रकृति आपको बार-बार बुलाती है

डॉ. शैलेश शुक्ला विश्व भर में पर्यटन उद्योग तेजी से बदल रहा है। आधुनिक यात्री अब केवल भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थलों, चमकदार होटलों और कृत्रिम

खुदरा दुकानदारों के साथ वित्तीय अन्याय अंततः देश को कमजोर बनाएगा

अनिल धर्मदेश मेगामार्ट, ऑनलाइन और रिटेल के मध्य प्रमुख प्रतियोगिता उत्पादों के मूल्य की है। उपभोक्ता और खुदरा दुकानदार भी ये दावा करते हैं कि

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