रजनी राणा भारतीय लोकतंत्र में विदेशी फंडिंग का प्रश्न नया नहीं है, लेकिन समय-समय पर यह बहस नए संदर्भों के साथ सामने आती रही है।
Category: Features
CAPF बिल के विरोध का ठोस कारण जानिए
गौतम चौधरी भारत की आंतरिक सुरक्षा व्यवस्था लंबे समय से एक जटिल लेकिन प्रभावी ढांचे पर टिकी रही है, जिसमें विभिन्न केंद्रीय अर्धसैनिक बल-सीआरपीएफ, बीएसएफ,
ईरान-इजरायल युद्ध की आंच चारधाम यात्रा तक
जयसिंह रावत पश्चिम एशिया में ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता युद्ध अब केवल क्षेत्रीय तनाव का विषय नहीं रह गया है, बल्कि इसके प्रभाव
IFDA पर भारत की सावधानीपूर्ण असहमति, चीनी प्रभाव से विश्व को सावधान करने की कोशिश
गौतम चौधरी वैश्वीकरण के वर्तमान चरण में निवेश अब केवल पूंजी प्रवाह का साधन नहीं रह गया है; यह कूटनीतिक प्रभाव, रणनीतिक विस्तार और वैश्विक
कहीं मध्य एशिया की सर्प जाति का सांस्कृतिक विस्तार तो नहीं भारत की नाग सभ्यता?
गौतम चौधरी इतिहास और मिथक के बीच की रेखा अक्सर धुंधली होती है, लेकिन इसी धुंधले अवशेषों में सभ्यताओं की आत्मा छिपी रहती है। फ़ारसी
अत्यंत गंभीर है कृत्रिम मेधा के विकास में भारतीय भाषाओं के डाटा की कमी का मामला
डॉ. शैलेश शुक्ला इक्कीसवीं सदी के तीसरे दशक में कृत्रिम मेधा या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस विश्व की सबसे प्रभावशाली तकनीकों में से एक बन चुकी है।
Kautilya’s Arthashastra : The Strength of the State Lies in Service to the People
By Gautam Chaudhary In the Indian philosophical tradition, the four Purusharthas—Dharma, Artha, Kama, and Moksha—hold special significance. Among them, Artha (wealth and material resources) occupies
कौटिल्य का अर्थशास्त्र : जनता की सेवा में निहित है राज्य की शक्ति
गौतम चौधरी भारतीय चिंतन परंपरा में पुरुषार्थ चतुष्टय-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का विशेष महत्व है। इनमें “अर्थ” को अत्यंत केंद्रीय स्थान प्राप्त है, क्योंकि
Iran War : Neither Global Hegemony Nor Religious Authoritarianism Can Be Justified
By Gautam Chaudhary Wars often begin with political debates, military strategies, and the ambitions of powerful leaders, but they invariably end in the immense suffering
उल्लू : मिथक, मान्यताएँ और वास्तविकता
ललित नारायण उपाध्याय मानव समाज में कुछ प्रतीक ऐसे होते हैं, जो समय के साथ अपनी वास्तविक पहचान से अधिक धारणाओं और मान्यताओं के बोझ
