सवाल दलितों के स्वाभिमान का/ दलित दूल्हे घोड़ी पर बैठने के अधिकार से वंचित क्यों?

बाबूलाल नागा आधुनिक भारत में भी जातिगत भेदभाव की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा राजस्थान से आई ताजा घटना से लगाया जा सकता है।

बारिश का बदलता मिज़ाज : झारखंड के कई क्षेत्रों में बढ़ रहा है वर्षा का वार्षिक औसत

गौतम चौधरी झारखंड, विशेषकर रांची में हाल के दिनों में हो रही लगातार बारिश ने एक स्वाभाविक जिज्ञासा को जन्म दिया है, क्या यह केवल

ट्रेंड बनाम सत्य : ब्राह्मण समाज पर बढ़ती कटुता और इतिहास की अनदेखी

अशोक कुमार झा आज के डिजिटल युग में सोशल मीडिया एक ऐसा मंच बन चुका है जहाँ विचारों की अभिव्यक्ति जितनी आसान हुई है, उतनी

राजनीतिक शोर थमते ही महंगाई की दस्तक शुरु

सौरभ वार्ष्णेय पांच राज्यों के चुनाव का राजनीतिक शोर थमते ही महंगाई ने फिर से देश में दस्तक दे दी। हालांकि ऐसा नहीं है कि

दुनिया से सीख कर हम भी बदल सकते हैं देश में किसान और मजदूर के हालात

राजेश जैन हर वर्ष एक मई आती है, भाषण होते हैं, मंच सजते हैं, श्रमिकों और किसानों के सम्मान में संदेश दिए जाते हैं और

भारतीय ज्ञान परंपरा के वाहक और ‘‘भामती’’ ग्रंथ के रचयिता, महान दार्शनिक वाचस्पति मिश्र

गौतम चौधरी भारतीय दर्शन की परंपरा में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके जीवन और कृतित्व में ज्ञान, तप और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम दिखाई

पाकिस्तान : सिंध प्रांत में बढ़ रहे असंतोष, पंजाबी बर्चस्व के खिलाफ अक्रोश नए संकेत

गौतम चौधरी वैसे तो संपूर्ण पाकिस्तान ही संगठित आपराधिक गिरोह और आतंकवादी संगठनों के जद में है लेकिन इधर के दिनों में न केवल आतंकवाद

कियारा आडवाणी कर रही कन्‍नड़ फिल्‍मों में डेब्‍यू

सुभाष शिरढोनकर निर्देशक गीतु मोहनदास व्‍दारा निर्देशित फिल्म ‘टॉक्सिक: ए फेयरी टेल फॉर ग्रोन -अप्स’ अपनी घोषणा के बाद से लगातार चर्चाओं में है। फिल्म

वामन-बलि की मिथकीय कथा और वर्तमान वैश्विक शक्ति-संतुलन की विहंगम व्याख्या

गौतम चौधरी पौराणिक कथाएँ केवल आस्था की वस्तु नहीं होतीं, वे मानव स्वभाव, सत्ता और नैतिकता के गहरे प्रश्नों को प्रतीकात्मक रूप में सामने लाती

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