गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसे सबसे अधिक क्षति उसके घोषित शत्रुओं से नहीं, बल्कि उसके घोषित रक्षकों से भी
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जहां सुनवाई होती है, वहीं बदलाव जन्म लेता है
बाबूलाल नागा लोकतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास, संवाद और साझेदारी का जीवंत माध्यम है। किसी भी लोकतांत्रिक
जंतर-मंतर की घटना : लोकतंत्र में लाठी नहीं जवाबदेही बोलनी चाहिए
गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी पहचान यह नहीं कि उसमें चुनाव होते हैं, बल्कि यह है कि नागरिक बिना भय के अपनी असहमति व्यक्त
लोकतंत्र की असली शक्ति शासन की विश्वसनीयता है, प्रशासन की वर्दी पर उठने लगे सवाल
गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत केवल संविधान या चुनाव नहीं होते। उसकी वास्तविक शक्ति नागरिकों का वह विश्वास होता है कि राज्य की
नैरेटिव का युद्ध : लोकतंत्र का सबसे बड़ा अदृश्य हथियार
गौतम चौधरी एक समय युद्ध तलवारों से लड़े जाते थे। फिर बंदूकें और तोपें आईं। बीसवीं शताब्दी में परमाणु हथियारों ने शक्ति का नया संतुलन
संवैधानिक मूल्य ही लोकतंत्र की आत्मा है
बाबूलाल नागा भारत का संविधान केवल एक विधिक दस्तावेज नहीं बल्कि न्याय, स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित राष्ट्र निर्माण का संकल्प है। यह केवल
बुलडोजर का कानून : क्या इस प्रकार का न्याय किसी लोकतंत्र का आदर्श हो सकता है?
गौतम चौधरी लोकतंत्र की असली परीक्षा संसद में नहीं, सड़क पर होती है; अदालतों में नहीं, बल्कि उस क्षण होती है जब राज्य अपने सबसे
सूचना आयुक्त की नियुक्ति : लोकतंत्र की पारदर्शिता का प्रहरी या राजनीतिक उपकार का माध्यम?
अशोक कुमार झा लोकतंत्र केवल चुनावों से संचालित होने वाली व्यवस्था नहीं है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की भागीदारी, शासन की पारदर्शिता, प्रशासन की
लोकतंत्र या हिंसातंत्र : किंकर्तव्यविमूढ़ लोक की नियति और लोक संवाद की पुनर्स्थापना
विवेक रंजन श्रीवास्तव राजतंत्र की राजनीति का एक स्पष्ट और स्वीकृत सिद्धांत रहा है, दंड विधान। वहाँ शत्रु और मित्र की परिभाषाएं सीमाओं, सिंहासनों और
दक्षिणपंथ/ ‘गनतंत्र’ के बाद ‘गणतंत्र’: वामपंथ का सर्वविधिक पतन
राकेश सैन पांच राज्यों के चुनाव परिणामों के बाद एक चुटुकला सुनने को मिला कि एक व्यक्ति ने अपने मित्र से कहा केरल में भी
