गौतम चौधरी भारत की जनजातीय पहचान केवल सामाजिक ढांचे का हिस्सा नहीं, बल्कि एक जीवंत सांस्कृतिक परंपरा है, जो प्रकृति, सामुदायिक जीवन और आध्यात्मिक मूल्यों
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‘मैं क्यों पढूं कुरान’, स्वधर्म रक्षा के प्रकाश स्तम्भ गुरु रविदास जी
राकेश सैन बीसवीं सदी के विचारक ओशो ने गुरु रविदास जी को बुद्ध पुरुषों रूपी तारों से भरे भारत के आकाश का ध्रुव तारा बताया
आस्था व विश्वास को यदि हथियार बना देंगे तो धर्म का क्या होगा?
गौतम चौधरी अभी हाल ही में बांग्लादेश में एक नए प्रकार के कथित लोकतंत्र समर्थित आन्दोलन में ऐसा बहुत कुछ हुआ जो समझ से पड़े
रमजान और महाकुंभ में धर्म और इंसानियत की एकजुटता का एक खास उदाहरण
खास रपट नयी दिल्ली/ जहां एक ओर सोशल मीडिया से लेकर आम जीवन तक में सांप्रदायिक जहर फैलाया जा रहा है, वहां कुछ मन को
बात धर्म के मर्म को समझिए, पूण्य के फेर में जान मत गमाइए
अंबुज कुमार यदि अध्यात्म की बात की जाए तो गोस्वामी तुलसीदास ने भी कहा है, ‘‘कलियुग केवल नाम आधारा,,, सुमिरि सुमिरि जन उतरे पारा।’’ अर्थात,
अपने आप में अद्भुत है धर्म के प्रति सत्ता का भारतीय दृष्टिकोण
गौतम चौधरी भारत, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक देश है। वैसे दुनिया के अधिकतर देश लोकतांत्रिक मूल्यों को आत्मसात किए हुए है लेकिन भारत उन
राज्य और धर्म के बीच की जटिलता को संतुलित करने में अभूतपूर्व भूमिका निभा रहा है भारत
डॉ. अनुभा खान भारत को दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र माना जाता है। भारत की एक विशेषता यह भी है कि यहां विभिन्न प्रकार की
धर्म या पंथ बदलने से जाति नहीं बदलती, पसमांदा मुसलमानों को सशक्त बनाना समावेशी राष्ट्र की जरूरतों में से एक
गौतम चौधरी भारतीय समाज की कुछ विशेषता है। उन विशेषताओं में से जाति, वर्ण और क्षेत्र भारतीय समाज के हर व्यक्ति के साथ जुड़ा हुआ
UCC का विरोध विशुद्ध राजनीतिक, इससे धर्म का कोई लेना देना नहीं
गौतम चौधरी धर्म, संप्रदाय, संस्कृति और धर्म के द्वारा बनाए हुए नियम इंसानी जिंदगी की खुशहाली के लिए बनाए गए हैं। अमूमन प्रत्येक धर्म अपने
धर्म का धंधा/ भगवान के मंदिरों में वीआईपी दर्शन का चलन सामंतवादी सोच का प्रतीक
डॉ. नर्मदेश्वर प्रसाद चौधरी हिन्दू धर्म बहुत ही पुराना और सनातन है लेकिन वैदिक काल से हमें ऐतिहासिक साक्ष्य के मिलने की गुंजाइश नजर आती
