साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी विवादित प्रतिमा हटाई गई, राजनीतिक बहस तेज

साल्ट लेक स्टेडियम के बाहर लगी विवादित प्रतिमा हटाई गई, राजनीतिक बहस तेज

कोलकाता/ पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता के निकट स्थित प्रतिष्ठित साल्ट लेक स्टेडियम परिसर में शनिवार सुबह उस समय हलचल मच गई, जब वीवीआईपी गेट के बाहर स्थापित एक विवादित प्रतिमा को प्रशासनिक कार्रवाई के तहत ध्वस्त कर दिया गया। अधिकारियों के अनुसार यह कदम राज्य सरकार के निर्देशों के बाद उठाया गया।

सुबह से ही इलाके में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारियों की तैनाती बढ़ा दी गई थी। भारी मशीनों की मदद से प्रतिमा को हटाने की कार्रवाई की गई। इस दौरान स्टेडियम के आसपास सुरक्षा के विशेष इंतज़ाम किए गए ताकि किसी प्रकार की अप्रिय स्थिति उत्पन्न न हो।

हालाँकि प्रशासन ने आधिकारिक रूप से यह स्पष्ट नहीं किया है कि प्रतिमा को हटाने का निर्णय किन कारणों से लिया गया, लेकिन सूत्रों का कहना है कि पिछले कुछ समय से प्रतिमा को लेकर विवाद और आपत्तियाँ सामने आ रही थीं। कुछ संगठनों ने इसे “अनधिकृत स्थापना” बताया था, जबकि दूसरी ओर कुछ समूह इसे सांस्कृतिक पहचान से जोड़कर देख रहे थे।

घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ भी सामने आने लगी हैं। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार पर “इतिहास और भावनाओं से खिलवाड़” करने का आरोप लगाया, जबकि सत्तारूढ़ पक्ष का कहना है कि प्रशासनिक नियमों और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।

स्थानीय लोगों के बीच भी इस कार्रवाई को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रिया देखी गई। कुछ लोगों ने इसे आवश्यक प्रशासनिक कदम बताया, तो कुछ ने बिना व्यापक सार्वजनिक चर्चा के प्रतिमा हटाए जाने पर सवाल उठाए।

राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि पश्चिम बंगाल में प्रतीकों, स्मारकों और ऐतिहासिक विरासत को लेकर विवाद नई बात नहीं है। राज्य की राजनीति में सांस्कृतिक पहचान और वैचारिक संघर्ष अक्सर सार्वजनिक स्थलों और प्रतीकों के माध्यम से भी सामने आते रहे हैं।

बता दें कि यह ढांचा किसी धार्मिक प्रतिमा का नहीं, बल्कि एक फुटबॉल-थीम आधारित कलात्मक संरचना था, जिसे ममता बनर्जी की अवधारणा पर बनाया गया बताया जाता है। इसे 2017 के 2017 FIFA U-17 World Cup के दौरान साल्ट लेक स्टेडियम के नवीनीकरण के समय स्थापित किया गया था।

इस संरचना में कमर तक दो फुटबॉलर जैसे पैर दिखाए गए थे, ऊपर “बिस्वा बांग्ला” का लोगो था और नीचे फुटबॉल पर “Joyee” लिखा हुआ था। सरकार और कुछ समर्थकों के अनुसार यह बंगाल की फुटबॉल संस्कृति और खेल भावना का प्रतीक माना गया था।

लेकिन वर्षों से इसकी डिजाइन को लेकर विवाद रहा। कई फुटबॉल प्रशंसकों और विपक्षी नेताओं ने इसे “अजीब”, “बेमेल” या “भद्दा” बताया। नई राज्य सरकार के खेल मंत्री ने कहा कि यह संरचना स्टेडियम की फुटबॉल विरासत का सही प्रतिनिधित्व नहीं करती।

फिलहाल प्रशासन की ओर से स्थिति सामान्य होने की बात कही गई है और इलाके में एहतियातन निगरानी जारी है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Translate »