BRICS को स्टार्टअप शक्ति बनाने की पहल : भारत ने इनक्यूबेटर नेटवर्क और नवोन्मेषण कोष का दिया प्रस्ताव

BRICS को स्टार्टअप शक्ति बनाने की पहल : भारत ने इनक्यूबेटर नेटवर्क और नवोन्मेषण कोष का दिया प्रस्ताव

नई दिल्ली/ भारत ने ब्रिक्स (BRICS) देशों के बीच नवाचार और उद्यमिता को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए ‘ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क’ और ‘ब्रिक्स स्टार्टअप नवोन्मेषण कोष (Startup Innovation Fund)’ के गठन का प्रस्ताव रखा है। इस पहल का उद्देश्य सदस्य देशों के स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र को आपस में जोड़ना, प्रौद्योगिकी सहयोग को बढ़ाना और उभरते उद्योगों में संयुक्त निवेश को प्रोत्साहित करना है।

यह प्रस्ताव भारत की अध्यक्षता में जयपुर में आयोजित 10वीं ब्रिक्स उद्योग मंत्रियों की बैठक के दौरान रखा गया। बैठक में सदस्य देशों ने उद्योग, नवाचार और आपूर्ति शृंखला सहयोग को भविष्य की आर्थिक वृद्धि का प्रमुख आधार माना।

भारत का मानना है कि ब्रिक्स देशों के पास विश्व की लगभग आधी आबादी, विशाल उपभोक्ता बाजार और तेजी से बढ़ती डिजिटल अर्थव्यवस्था है। ऐसे में यदि इन देशों के स्टार्टअप, विश्वविद्यालय, अनुसंधान संस्थान और निवेशक एक साझा मंच पर आएं, तो वैश्विक स्तर पर एक मजबूत नवाचार नेटवर्क तैयार किया जा सकता है।

क्या है ब्रिक्स इनक्यूबेटर नेटवर्क?

भारत ने प्रस्ताव दिया है कि ब्रिक्स देशों के प्रमुख स्टार्टअप इनक्यूबेटर, प्रौद्योगिकी संस्थान, विश्वविद्यालय और उद्योग जगत को एक साझा नेटवर्क से जोड़ा जाए। इसके माध्यम से स्टार्टअप्स को विशेषज्ञ मार्गदर्शन (मेंटोरशिप), अनुसंधान सहयोग, नई तकनीकों तक पहुंच, निवेशकों से संपर्क और सदस्य देशों के बाजारों में प्रवेश के अवसर मिल सकेंगे। इस नेटवर्क से विभिन्न देशों के युवा उद्यमियों के बीच ज्ञान और अनुभव का आदान-प्रदान भी आसान होगा।

नवोन्मेषण कोष का उद्देश्य

भारत ने एक साझा स्टार्टअप नवोन्मेषण कोष बनाने का भी सुझाव दिया है। प्रस्तावित कोष का उपयोग शुरुआती चरण के स्टार्टअप्स को वित्तीय सहायता देने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), हरित प्रौद्योगिकी, जैव प्रौद्योगिकी, सेमीकंडक्टर, स्वच्छ ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे रणनीतिक क्षेत्रों में नवाचार को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है। यदि इस प्रस्ताव को सभी सदस्य देशों का समर्थन मिलता है, तो यह कोष संयुक्त अनुसंधान एवं विकास परियोजनाओं को भी वित्तपोषित कर सकेगा।

उद्योग सहयोग पर भी जोर

बैठक के दौरान सदस्य देशों ने सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), डिजिटल विनिर्माण, लॉजिस्टिक्स, सौर ऊर्जा, कौशल विकास और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति व्यक्त की।

भारत ने इस अवसर पर इस बात पर बल दिया कि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं के बीच ब्रिक्स देशों को नवाचार आधारित विकास मॉडल अपनाने की आवश्यकता है।

अभी केवल प्रस्ताव

हालांकि, भारत द्वारा प्रस्तुत दोनों पहलें अभी प्रस्ताव के स्तर पर हैं। इन्हें लागू करने के लिए ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच वित्तीय योगदान, संचालन व्यवस्था और संस्थागत ढांचे पर आगे विस्तृत चर्चा होगी। अंतिम निर्णय सभी सदस्य देशों की सहमति से ही लिया जाएगा।

क्यों महत्वपूर्ण है यह पहल?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह पहल मूर्त रूप लेती है, तो ब्रिक्स देशों के बीच पूंजी, तकनीक और प्रतिभा का एक नया सहयोगी तंत्र विकसित हो सकता है। इससे सदस्य देशों के स्टार्टअप्स को पश्चिमी निवेश और तकनीकी नेटवर्क पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी तथा वैश्विक नवाचार व्यवस्था में ब्रिक्स की भूमिका और मजबूत हो सकती है।

भारत के लिए भी यह पहल केवल स्टार्टअप प्रोत्साहन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि प्रौद्योगिकी नेतृत्व, आर्थिक कूटनीति और दक्षिण-दक्षिण सहयोग को नई दिशा देने का एक महत्वपूर्ण प्रयास मानी जा रही है।

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