बाबूलाल नागा डिजिटल क्रांति के इस दौर में खबरों का स्वरूप पूरी तरह बदल चुका है। कभी न्यूजरूम और बड़े मीडिया संस्थानों तक सीमित रहने
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भारतीय तटरक्षक बल : समुद्री सीमा पर सन्नद्ध-सजग प्रहरी
प्रमोद दीक्षित मलय लगभग पांच दशक पहले जब मैं एक कस्बे में रहकर प्रारम्भिक शिक्षा ग्रहण कर रहा था, तब कक्षा में एक छात्र इलेक्ट्रानिक
पुण्यतिथि 17 फरवरी पर विशेष/ आक्रामक राष्ट्रवाद के सैद्धांतिक प्रणेता वासुदेव बलवंत फड़के
प्रमोद दीक्षित मलय पुणे में स्थित सैन्य लेखा विभाग के अधिकारी कक्ष में घुसते ही उस 25 वर्षीय युवक ने अधिकारी की मेज पर एक
मास्टर दा के नाम से विख्यात सूर्य सेन, जिनसे पूरी फिरंगी हुकूमत खौप खाती थी
गौतम चौधरी फिरंगियों के खिलाफ संघर्ष और स्वातंत्र समर का इतिहास मास्टर दा यानी मास्टर सूर्य सेन के बिना अधूरा है। अभी हाल ही में
दो प्रेरक पत्र जिन्होंने पीढ़ियों को दिशा दी
शम्भू शरण सत्यार्थी पत्र लेखन केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि विचारों, मूल्यों और जीवनदर्शन को अगली पीढ़ियों तक पहुँचाने का सबसे जीवंत तरीका है।
सरकार की अच्छी पहल/ अख़बार पढ़ने से बच्चे में आएगी जागरूकता, लोकतांत्रिक नींव होगी मजबूत
बाबूलाल नागा राजस्थान सरकार के स्कूल शिक्षा विभाग ने हाल में 31 दिसंबर को एक आदेश जारी कर सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को नियमित रूप
समावेशी राष्ट्रवाद के प्रखर पैरोकार डॉ. मुख़्तार अहमद अंसारी
गौतम चौधरी वह दौर स्वतंत्र समर का था। ऐसे समय में डॉ. मुख़्तार अहमद अंसारी भारत के राष्ट्र-निर्माण बेहद तसल्ली लगे थे। उन्होंने अपने जीवन
यह तो वक्त ही बताएगा कि पेसा कानून से झारखंड के आदिवासियों को फायदा हुआ या हानि
गौतम चौधरी अंततोगत्वा हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाली महागठबंधन की सरकार ने झारखंड में पेसा कानून लागू कर दिया। लागू कानून में कई विसंगतियां हो
चुम्बन यदि मर्यादा में हो तो इसमें बुराई क्या है?
जगदीश ओटवाल पश्चिमी देशों में चुम्बन खुले आम लिया जाता है। खुलेआम स्त्री -पुरूष चुम्बन पर नाराज नहीं हुआ जाता। वस्तुतः स्त्री के चुम्बन हमारे
2 जनवरी उनके शहादत दिवस पर विशेष/ प्रतिरोध की अमर आवाज़ सफदर हाशमी
शम्भू शरण सत्यार्थी सफदर हाशमी का जीवन भारतीय रंगमंच के इतिहास में एक ऐसे उज्ज्वल अध्याय की तरह दर्ज है, जहाँ कला, विचार और संघर्ष
