नयी दिल्ली/पटना/कोलकाता/रांची/ दक्षिण-पश्चिम मानसून अब पूरे देशभर में सक्रिय है लेकिन उसकी चाल इस वर्ष भी असमान बनी हुई है। जुलाई का मध्य आते-आते देश
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आतंकवादी हिंसा को रोकने के लिए सबसे पहले चरमपंथ को तसल्ली से समझना होगा
गौतम चौधरी आज दुनिया जिस सबसे जटिल संकट से जूझ रही है, वह केवल आतंकवाद या हिंसा का संकट नहीं है; वह विचारों के कट्टर
रटाने वाली शिक्षा और भारतीय मध्यमवर्गी का द्वंद्व
सरदूल सिंह आज हर माता-पिता, विशेषकर मध्यम वर्ग, अपने बच्चों की शिक्षा और भविष्य को लेकर अत्यंत चिंतित हैं। सरकारी स्कूलों में पर्याप्त शिक्षकों का
ऑस्टेलिया स्थित डॉल्फिन टंग्स्टन खदान का खुलना तीसरे विश्वयुद्ध की दस्तक तो नहीं?
गौतम चौधरी इतिहास केवल बीते समय का दस्तावेज नहीं होता; वह भविष्य की आहट भी देता है। कई बार ऐसी घटनाएँ घटती हैं जो अपने
भारतीय मुस्लिम समाज : बहुलतावादी सांस्कृतिक स्वरूप, सामाजिक सहभागिता और राष्ट्र-निर्माण भागीदारी
गौतम चौधरी हाल ही में सहारनपुर के रहने वाले वरिष्ठ चिंतक और सामाजिक कार्यकर्ता डॉ. असलम खान साहब ने एक व्यक्तिगत अनुभव साझा किया। उन्होंने
Lifestyle/ जीवन को यदि रंगीन बनाना है तो चाहिए एक रोमांटिक पति
आरती रानी एक जमाना था जब पत्नी अपने पति को देवता मानकर उसकी इच्छानुसार ही स्वयं को भी ढालने का प्रयास करती थी। इसी कारण
नैरेटिव का युद्ध : लोकतंत्र का सबसे बड़ा अदृश्य हथियार
गौतम चौधरी एक समय युद्ध तलवारों से लड़े जाते थे। फिर बंदूकें और तोपें आईं। बीसवीं शताब्दी में परमाणु हथियारों ने शक्ति का नया संतुलन
सिंधु घाटी : दम घोंटती धूल और धुआं, गायब होते ग्लेशियर
जयसिंह रावत आषाढ़ पूर्णिमा (गुरु पूर्णिमा) के पावन अवसर पर शुरू हुई विख्यात अमरनाथ यात्रा इस समय अपने चरम पर है लेकिन यात्रा के पहले
महुआ : एक वृक्ष नहीं, भारतीय सभ्यता की स्मृति
औपनिवेशिक नीतियों से लेकर स्वतंत्र भारत की उपेक्षा तक गौतम चौधरी यह केवल एक वृक्ष की व्यथा कथा नहीं है, यह भारत की उस संमृद्धि
पारदर्शिता और बेहतर प्रबंधन से ही वक़्फ़ की गरिमा और मर्यादा वापस आ पाएगी
गौतम चौधरी वक़्फ़ इस्लाम की सबसे महत्वपूर्ण सामाजिक संस्थाओं में से एक है। सदियों से मस्जिदें, कब्रिस्तान, मदरसे, अनाथालय, दरगाहें और अनेक धर्मार्थ संस्थान उन
