भारतीय पुलिस व्यवस्था : न्याय, जांच और “कहानी गढ़ने” की प्रवृत्ति, गंभीर संकट के संकेत

गौतम चौधरी भारतीय लोकतंत्र में पुलिस और जांच एजेंसियों की भूमिका केवल अपराधी पकड़ने तक सीमित नहीं है, वे राज्य की न्यायिक विश्वसनीयता का सबसे

राफेल डील की सेहत पर असर : UAE की आर्थिक रणनीति और भारत के तकनीक हस्तांतरण की मांग

कलीमुल्ला खान दुनिया की रक्षा राजनीति में हथियार अब केवल सैन्य उपकरण नहीं, वे रणनीतिक निर्भरता, तकनीकी संप्रभुता और भू-राजनीतिक प्रभाव के साधन बन चुके

भारत : 80 करोड़ को राशन और 200 करोड़ का ब्लाउज, विपरीत ध्रुवों के बीच खड़ा एक राष्ट्र

अक्षपाद् भारत एक विचित्र मोड़ पर खड़ा है। एक ओर वह विश्वगुरु बनने के सपने देख रहा है, चंद्रमा पर पहुंचने का गौरव गा रहा

नागरिकता का ठोस आधार भारतीय संवैधान है, पंथ, धर्म, भाषा, जाति की कपोल कल्पना नहीं

गौतम चौधरी आधुनिक भारतीय सार्वजनिक जीवन के शोर-गुल के बीच एक शांत लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण प्रश्न लगातार मौजूद है, क्या मैं इस देश से संबंधित

अब भाजपा को परखने का नजरिया बदलना होगा

राकेश सैन भारतीय जनता पार्टी की बंगाल जीत ने केवल राष्ट्रीय ही नहीं बल्कि अंतर्राष्ट्रीय राजनीतिक विश्लेषकों का भी ध्यान आकर्षित किया है। सभी अपने-अपने

पंजाब धमाकों का बहुस्तरीय संकेत, सीमाओं से परे साज़िश या आंतरिक चुनौती?

अक्षपाद् पंजाब एक बार फिर सुरक्षा और राजनीतिक बहस के चौराहे पर है। अमृतसर और जालंधर में हाल ही में हुए कम तीव्रता के धमाकों

लहूलुहान लोकतंत्र : क्या नई सरकार बदलेगी बंगाल का हिंसक इतिहास?

ओ.पी.पाल पश्चिम बंगाल की जनता ने भाजपा को प्रचंड बहुमत देकर एक बदलाव की उम्मीद जताई है लेकिन यदि यह बदलाव केवल श्चेहरोंश् का है

सवाल दलितों के स्वाभिमान का/ दलित दूल्हे घोड़ी पर बैठने के अधिकार से वंचित क्यों?

बाबूलाल नागा आधुनिक भारत में भी जातिगत भेदभाव की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसका अंदाजा राजस्थान से आई ताजा घटना से लगाया जा सकता है।

गालवलकर के एकात्म सांस्कृतिक राष्ट्र की अवधारणा बनाम समावेशी राष्ट्र व भारतीय संविधान का संघीय ढ़ंचा

गौतम चौधरी भारत केवल एक राजनीतिक इकाई नहीं, बल्कि भाषा, संस्कृति, जातीय स्मृतियों और क्षेत्रीय अस्मिताओं का विराट संगम है। यही कारण है कि भारतीय

डॉ. कार्ल मार्क्स : ‘‘दुनिया में ऐसी कोई समस्या नहीं होती जिसका भौतिक समाधान मौजूद न हो’’

सरदूल सिंह 5 मई 1818 को जर्मनी के त्रियेर शहर में जन्मे डॉ. कार्ल मार्क्स एक ऐसे महान दार्शनिक सिद्ध हुए जिनके विचारों ने न

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