मीडिया की स्वतंत्रता और पत्रकारों की सुरक्षा का सवाल…?

प्रभुनाथ शुक्ल पत्रकारिता और बदलते दौर का सच एक आम विमर्श का मुद्दा बन गया है। अमूमन यह देखा जा रहा है कि आमतौर पर

विकास का दूसरा चेहरा, उखड़ते हाईवे और एक्सप्रेस-वे

ज्ञान चंद पाटनी देश में जिस तेजी से सड़कें, पुल, फ्लाईओवर और दूसरे सार्वजनिक ढांचे खड़े किए जा रहे हैं, उससे विकास की चमकीली तस्वीर

मक्का समझौता : नया ‘इस्लामिक नाटो’ या पश्चिम एशिया की बदलती सुरक्षा व्यवस्था?

गौतम चौधरी पश्चिम एशिया में 7 अगस्त को हुआ मक्का समझौता पहली नजर में तीन देशों-सऊदी अरब, तुर्किये और पाकिस्तान, के बीच हुआ एक रक्षा

एम्प्लॉयी जेनरेशन औपनिवेशिक मानसिकता, एम्प्लॉयर जेनरेशन की मानसिकता लानी होगी

पंकज जायसवाल जेन-जी और पेपर लीक के आंदोलनों की जड़ में जाएँ, तो अंततः वहाँ एक ही सवाल दिखाई देता है वह है रोजगार का

इस्लामी आउटरीच, डिजिटल मीडिया और मुस्लिम युवाओं के सामने कट्टरपंथ की चुनौती

गौतम चौधरी धर्म मनुष्य को जोड़ता है। यह आपस के समन्वय का सबसे शक्तिशाली मानवीय व्यवस्थाओं में से एक रहा है लेकिन जब धर्म तक

सत्ता बदली, राजनीति नहीं : सू ची व हसीना की वापसी से दक्षिण एशिया की राजनीति में उबाल

गौतम चौधरी दक्षिण एशिया में बीता सप्ताह केवल दो पुरानी राजनीतिक हस्तियों की सार्वजनिक वापसी की घटना नहीं था। यह उस गहरे संकट का आईना

तिरहुत की लोकस्मृतियों से प्रेरित कथा/ ‘‘बूढ़ा पीपल और डूबा हुआ गाँव’’

गौतम चौधरी ‘‘बचपन में नेनुआ-फरकिया, खगड़िया आदि की कहानियां सुनने को मिलती थी। वो कहानियां बेहद रोचक और रोमांचकारी होती थी। कहानियां का कोई लिखित

क्या BRICS दे सकता है विश्व बैंक-IMF को चुनौती?

सनोज राणा विश्व राजनीति और अर्थव्यवस्था एक नए दौर में प्रवेश कर रही है। बीते वर्षों में BRICS केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह नहीं रहा,

शुल्क लगाने से थम सकेत हैं UPI के बढ़ते कदम

ज्ञान चंद पाटनी भारत में डिजिटल भुगतान की कहानी अगर किसी एक मंच के इर्द-गिर्द सबसे अधिक मजबूती से लिखी गई है, तो वह है

राजमहल की पहाड़ियों से उठती सभ्यता की गुंज

कुमार कृष्णन राजमहल की पहाड़ियों में बहती हवा केवल पेड़ों की सरसराहट नहीं, बल्कि एक प्राचीन सभ्यता की स्मृतियों को भी अपने साथ लेकर चलती

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