पवर्त की पुकार/ सुरंगों से तबाह हो रहा है हिमालय का भूगर्भीय जल चक्र

जयसिंह रावत उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित 520 मेगावाट की विष्णुगाड-पीपलकोटी जलविद्युत परियोजना की टेल-रेस टनल में हुए भीषण हादसे ने एक बार फिर

मध्यवर्ग पर बढ़ता आर्थिक दबाव और बदलती जीवनशैली

राम शर्मा भारत की अर्थव्यवस्था की चर्चा जब भी होती है, तो तेज आर्थिक विकास, बढ़ती प्रति व्यक्ति आय, डिजिटल क्रांति और उपभोग के विस्तार

OECD के आईने में भारतीय अर्थव्यवस्था, विकास की रफ्तार और जेब की हकीकत

गौतम चौधरी भारतीय अर्थव्यवस्था की तस्वीर इन दिनों दो विरोधी रंगों में दिखाई देती है। एक ओर भारत दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में तेज गति

उत्तर प्रदेश में योगी को फ्री हैंड, केशव केंद्र में मंत्री, तो असीम हो सकते हैं डिप्टी सीएम

राजेश श्रीवास्तव भाजपा का संगठनात्मक बदलाव काफी देरी से हुआ है, लेकिन यह श्देर आए दुरुस्त आएश् जैसा है। जेन-जी के सफल आंदोलनों ने सरकार

‘उद्योग’ की नई परिभाषा और मजदूरों के अधिकारों का सवाल, बदल रहा है श्रम-कानूनों का वह दायरा

यह आलेख मजदूर बिगुल पत्रिका से लिया गया है सर्वाेच्च न्यायालय की नौ-सदस्यीय संविधान पीठ ने 20 अगस्त 2026 को ‘उद्योग’ की कानूनी परिभाषा से

त्योहारों पर भी बाजार सूने : घटती क्रय शक्ति और आर्थिक मंदी का गहराता संकट

सरदूल सिंह उत्तर भारत के प्रसिद्ध त्योहार रक्षाबंधन, ईद के साथ-साथ राजस्थान के प्रमुख लोक मेलों-बाबा रामदेव जयंती और गोगाजी मेले का समय है। अमूमन

कानून के पहरेदारों की नियुक्ति में कानून की कसौटी : झारखंड के नए लॉ ऑफिसर नियमों पर उठते गंभीर सवाल

गौतम चौधरी झारखंड लॉ ऑफिसर्स (Engagement) Rules, 2026 को लेकर उठे सवाल महज सरकारी वकीलों की नियुक्ति की प्रक्रिया तक सीमित नहीं हैं। इनके केंद्र

मानसून की वापसी पर मौसम विज्ञान विभाग का दृष्टिकोण ही बेहतर पूर्वानुमान

गौतम चौधरी वर्तमान समय में मानसून को लेकर मौसम संबंधी खबरें केवल मौसम का हाल नहीं बतातीं, बल्कि खेती, जलस्रोत, बिजली उत्पादन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था,

देवभूमि हिमालय : कुल्लू घाटी में देवताओं की जीवंत परंपरा

वीरेंद्र बांगड़ू virendrabangroo@gmail.com कुल्लू का धार्मिक संसार अपनी विशिष्टता के लिए जाना जाता है। यहां परंपरागत रूप से लगभग हर गांव का अपना देवता है।

आर्थिक चर्चा/ OTS के महाजाल में फंसते उपभोक्ता, सावधानी जरूरी

पंकज जायसवाल कर्ज लेना आज जीवन का सामान्य हिस्सा बन चुका है। घर खरीदना हो, कारोबार शुरू करना हो, पढ़ाई करनी हो या फिर कभी-कभी

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