सुभाष शिरढोनकर 1980 के दशक के उत्तरार्ध में भारतीय सिनेमा में वैनिटी वैन कल्चर का आगमन मनोरंजन उद्योग के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ साबित
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सूचना आयुक्त की नियुक्ति : लोकतंत्र की पारदर्शिता का प्रहरी या राजनीतिक उपकार का माध्यम?
अशोक कुमार झा लोकतंत्र केवल चुनावों से संचालित होने वाली व्यवस्था नहीं है। लोकतंत्र की वास्तविक शक्ति जनता की भागीदारी, शासन की पारदर्शिता, प्रशासन की
तो मानव संसाधन विकास के नए मॉडल की ओर बढ़ रहा है झारखंड?
गौतम चौधरी झारखंड की राजनीति पर चर्चा होती है तो आमतौर पर खनिज संपदा, आदिवासी प्रश्न, कानून-व्यवस्था या राजनीतिक उठापटक जैसे विषय केंद्र में रहते
संस्कृति और संस्कार : समाज या व्यक्ति का स्वरूप ही नहीं संसाधन व पूंजी भी है
गौतम चौधरी हमारे समय की एक बड़ी विडंबना यह है कि संस्कृति पर चर्चा तो बहुत होती है लेकिन संस्कृति को समझने का प्रयास कम
शाण्डिल्य से सूफ़ी तक : प्रेम, अध्यात्म और साम्राज्य के बीच एक आलोचनात्मक संवाद
गौतम चौधरी मानव सभ्यता के आध्यात्मिक इतिहास में प्रेम एक ऐसा सूत्र है जो विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों को अदृश्य रूप से जोड़ता है।
मॉस्को का एंटी-फासिस्ट फ़ोरम 2026 : फासीवाद-विरोध का वैश्विक मंच या नई भू-राजनीतिक वैचारिकी?
गौतम चौधरी मई 2026 में मॉस्को में आयोजित तृतीय अंतरराष्ट्रीय एंटी-फासिस्ट फ़ोरम केवल एक राजनीतिक सम्मेलन नहीं था। यह उस वैचारिक संघर्ष का प्रतीक था
इंडिया गठबंधन के 5 निर्णय से विपक्ष को मिली संजीवनी
सौरभ वार्ष्णेय अभी हाल ही में ५ राज्यों के चुनावों के बाद देश की राजनीति में विपक्षी दलों के गठबंधन (इंडियन नेशनल डेवलपमेंटल इन्क्लूसिव अलायंस)
बच्चों के समग्र विकास का आधार : सूर्य नमस्कार, मंत्र और प्राणायाम
कुमार कृष्णन आधुनिक युग में बच्चों का जीवन अत्यधिक प्रतिस्पर्धी और मानसिक रूप से तनावपूर्ण हो गया है। आज की इस भागदौड़ भरी दुनिया में
समाचार माध्यम यानी मीडिया श्रेष्ठ दुनिया का आधार तो है ही
डॉ. मत्स्येन्द्र प्रभाकर आज का युग श्सूचना का युगश् है। इस युग में मीडिया केवल समाचार देने का माध्यम नहीं है। बल्कि यह जनमत निर्माण,
भारत : दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र या फिर सबसे बड़ा निर्वाचनी अधिनायकवाद?
गौतम चौधरी भारत लंबे समय से स्वयं को दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में प्रस्तुत करता रहा है। यह दावा केवल उसकी जनसंख्या
