50वां पुण्य स्मरण/ भारत की आजादी के शुभ मुहूर्त-प्रदाता : पं. सूर्यनारायण व्यास

देशना जैन भारतीय सभ्यता में समय-समय पर ऐसे व्यक्तित्व उभरे हैं जिनकी प्रतिभा को किसी एक दायरे में बांधना मुश्किल है। पं. सूर्यनारायण व्यास ऐसे

जलवायु संकट और कृषि का भविष्य : क्या BRICS देश खाद्य सुरक्षा का नया मॉडल गढ़ सकते हैं?

गौतम चौधरी इक्कीसवीं सदी की सबसे बड़ी चुनौतियों में यदि दो विषयों को एक साथ रखा जाए तो वे हैं—जलवायु परिवर्तन और खाद्य सुरक्षा। दुनिया

अनगढ़, अव्यवस्थित और गैरजवाबदेह भीड़ को पहाड़ की पीड़ सुननी ही पड़ेगी

राकेश सैन साल 1992 में पंजाब के सीमांत कस्बे अबोहर के डीएवी कालेज से हम पांच विद्यार्थी हिमाचल प्रदेश के मकलोडगंज के लिए साइकिल यात्रा

एडिनबर्ग में सुश्रुत की प्रतिमा : प्राचीन भारतीय विज्ञान की आधुनिक प्रतिष्ठा

गौतम चौधरी गत 19 जून को Royal College of Surgeons of Edinburgh के ऐतिहासिक परिसर में महर्षि Sushruta की कांस्य प्रतिमा की स्थापना केवल एक

वसुधा पर विकास का योग-वितान : स्वास्थ्य, सौहार्द और समष्टि का शाश्वत सूत्र

दुर्गेश्वर राय अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस आज केवल एक वार्षिक आयोजन नहीं, बल्कि वैश्विक चेतना का ऐसा उत्सव बन चुका है जो स्वास्थ्य, संतुलन और मानवीय

आरोप, आशंका और यथार्थ : क्या भारत सचमुच ‘नरसंहार के आठवें चरण’ में है?

गौतम चौधरी अमेरिकी सांसद Ilhan Omar का हालिया बयान भारत में एक नई बहस को जन्म दे गया है। उनका दावा है कि विभिन्न रिपोर्टों

न्यूनतम मजदूरी : मेहनतकशों की आवाज़ और सत्ता का भय

गौतम चौधरी भारतीय राजनीति में एक विचित्र विडम्बना लगातार गहराती जा रही है। एक ओर चुनावी मंचों पर “विश्वगुरु”, “पाँच ट्रिलियन अर्थव्यवस्था” और “विकसित भारत”

उग्रवाद की चुनौती एवं समाधान का एक मात्र रास्ता है शांतिपूर्ण व लचीले समाज का निर्माण

गौतम चौधरी देश, समाज, राष्ट्र #उग्रवाद #चुनौती #समाधान #शांतिपूर्ण और लचीले समाज का निर्माण तेजी से बदलती दुनिया में उग्रवाद केवल एक सुरक्षा समस्या नहीं

समावेशी शासन की प्राथमिकता को हमें समझना होगा

शशांक मणि त्रिपाठी लोकतांत्रिक शासकीय प्रणाली में “अधिकतम सहभागिता“ के सिद्धांत की सरकार होती है। इस शासकीय व्यवस्था में, “सबका साथ, सबका विकास एवं सबका

सारिपुत्र से नालंदा तक : भारत की वह ज्ञान-परंपरा जिसे हमें याद रखना होगा

गौतम चौधरी बिहार के नालंदा के खंडहरों में घूमते हुए अधिकांश लोग ईंट-पत्थरों, स्तूपों और टूटी हुई दीवारों को देखते हैं। कुछ लोग वहाँ प्राचीन

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