केशव राजू एक अमेरिकी सांसद द्वारा लिखा गया एक लेख – और उसके बाद भारत की उनकी यात्रा (एक ऐसी यात्रा जिसकी शुरुआत कोलकाता से
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2014 के बाद के भारत का आलोचनात्मक विवेचन : तो सचमुच नरेन्द्र मोदी की सरकार क्रूर पूंजीवार के मजबूत बना रही है?
गौतम चौधरी 2014 में जब नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में लौटी, तब भारतीय राजनीति में केवल सरकार नहीं
24 मई 2026 की प्रमुख खबरें : मानसून पूर्व बारिश और आंधी, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली-एनसीआर में मौसम सुहावना
राष्ट्रीय समाचार प्रधानमंत्री Narendra Modi और अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio के बीच दिल्ली में महत्वपूर्ण वार्ता हुई। भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी, व्यापार और रक्षा सहयोग
भारत : अंतर धार्मिक संवाद का देश, जहां समय-समय पर पांथिक विमर्श भी जरूरी
गौतम चौधरी भारत जैसे देश में धर्म केवल पूजा-पद्धति नहीं, बल्कि लोगों की स्मृतियों, संस्कारों, त्योहारों, जीवन पद्धति और जीवन-दृष्टि का हिस्सा है। यहाँ एक
अलनीनो से प्रभावित होने के बाद भारत के पास क्या इंतजाम?
सौरभ वार्ष्णेय दुनिया भर में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों के बीच अलनीनो एक बार फिर भारत के लिए चिंता का विषय बनता जा रहा
“मिर्ज़ापुर भइल गुलज़ार …. ” – एक कजरी में छिपी सांस्कृतिक विरासत, विरह, गिरमिटिया संघर्ष और सभ्यता की उदासी
गौतम चौधरी भारतीय लोकजीवन में कुछ गीत ऐसे होते हैं जो केवल गाए नहीं जाते, बल्कि पीढ़ियों तक एक समाज की स्मृति बनकर जीवित रहते
राफेल की डील : आधुनिक दौर में बदल रही भारतीय रक्षा नीति का स्वरूप
गौतम चौधरी भारत और फ्रांस के बीच प्रस्तावित 114 राफेल लड़ाकू विमानों की डील केवल एक रक्षा सौदा नहीं है। यह अब उस बड़े प्रश्न
रहस्य-रोमांच/ क्या सच-मुच हमारी इस आधुनिक सभ्यता के बीच आ चुके हैं एलियंस?
उमेश कुमार साहू ष्या तो हम इस असीम ब्रह्मांड में बिल्कुल अकेले हैं, या फिर हमारे अलावा भी कोई और है… ‘दोनों ही परिस्थितियां दिल
The West Asia Crisis : The Army Vice Chief’s Warning, the Return of “Hard Power,” and India’s Dilemma
Gautam Choudhary The world once again appears to be standing at a crossroads where, alongside the language of diplomacy, the distorted and increasingly loud echoes
पश्चिम एशिया का संकट : सैन्य उपप्रमुख की चेतावनी, “हार्ड पावर” की वापसी और भारत की दुविधा
गौतम चौधरी दुनिया एक बार फिर ऐसे मोड़ पर आकर खड़ी हो गयी है जहाँ कूटनीति की भाषा के समानांतर सैन्य शक्ति की विकृत और
