लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता समानता से बनती है, चयनात्मकता से नहीं

गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसे सबसे अधिक क्षति उसके घोषित शत्रुओं से नहीं, बल्कि उसके घोषित रक्षकों से भी

क्या कॉकरोच आंदोलन का असर आने वाले चुनावों पर पड़ेगा?

राजेश श्रीवास्तव 12 साल पुरानी केंद्र की मोदी सरकार, मामला चाहे सीएए-एनआरसी प्रोटेस्ट का हो या संसद में बीच सत्र से 146 विपक्षी सांसदों का

बाज़ार: AI का उफान थमा, अब बारी वास्तविक मूल्यांकन की

अक्षपाद् गौतम किसी नई तकनीक का सबसे कठिन दौर वह होता है, जब दुनिया उससे परिणाम मांगने लगती है। कृत्रिम मेधा (AI) आज ठीक इसी

वियतनाम का चंपा : अंगदेश की सांस्कृतिक स्मृति का अवशेष?

गौतम चौधरी इतिहास में कुछ प्रश्न ऐसे होते हैं जिनका उत्तर किसी एक शिलालेख, किसी एक ग्रंथ या किसी एक पुरातात्त्विक खोज से नहीं मिलता।

गाड़ी खरीदने के बजाय किराये की गाड़ी के प्रयोग के बहुआयामी लाभ

डॉ. शैलेश शुक्ला बीसवीं सदी ने दुनिया को यह विश्वास दिलाया कि निजी कार आधुनिकता, समृद्धि और स्वतंत्रता का सबसे बड़ा प्रतीक है लेकिन इक्कीसवीं

स्मृर्ति शेष : हिन्दी के पहले तिलिस्मी लेखक बाबू देवकीनन्दन खत्री

मोहन मंगलम बाबू देवकीनन्दन खत्री एक दूरदर्शी लेखक थे। अपनी अद्भुत कल्पना और सरल लेखन शैली से उन्होंने हिन्दी साहित्य को एक नई दिशा दी।

कॉकरोच आंदोलन – डिजिटल युग में जनमत का नया स्वरूप

जयसिंह रावत ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ के बैनर तले युवाओं के अभूतपूर्व और स्वतःस्फूर्त आंदोलन की असाधारण सफलता ने देश के राजनीतिक गलियारों को हिलाकर रख

जहां सुनवाई होती है, वहीं बदलाव जन्म लेता है

बाबूलाल नागा लोकतंत्र केवल एक शासन व्यवस्था नहीं, बल्कि जनता और सरकार के बीच विश्वास, संवाद और साझेदारी का जीवंत माध्यम है। किसी भी लोकतांत्रिक

आंदोलनकारियों की भाषा और सत्ता की जवाबदेही

ज्ञान चंद पाटनी धर्मेंद्र प्रधान के केंद्रीय शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफे और परीक्षा व्यवस्था में सुधार की घोषणा के बाद कई प्रतिक्रियाएं सामने

सारनाथ अब यूनेस्को की विश्व धरोहर : उत्तर प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को वैश्विक पहचान

रामस्वरूप रावतसरे उत्तर प्रदेश के इतिहास और सांस्कृतिक सफर में एक बड़ा ऐतिहासिक मोड़ आया है। वाराणसी के पास स्थित सारनाथ को यूनेस्को की विश्व

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