तन्जीह बनाम तश्बीह : इस्लामी धर्मशास्त्र की दो व्याख्यात्मक परंपराएँ, इसे तसल्ली से समझना होगा

#वृतांतों_की_यात्रा/ #दरभंगा/ पार्ट 01/ #कांच की #चूड़ियां/ गौतम चौधरी ’‘लैसा कमिस्लिही शै‘उन’’: उसके समान कोई भी वस्तु नहीं है। (सूरह अश-शूरा 42ः11) इस्लाम की संपूर्ण

Translate »