नयी दिल्ली/ देश की सबसे प्राचीन पर्वतमालाओं में से एक अरावली की वास्तविक सीमा और परिभाषा को लेकर चल रहे विवाद के बीच उच्चतम न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। न्यायालय ने केंद्र सरकार की ओर से प्रस्तुत रिपोर्ट की स्वतंत्र समीक्षा के लिए एक उच्चस्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया है। भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (आईसीएफआरई) की महानिदेशक कंचन देवी की अध्यक्षता वाली इस समिति को रिपोर्ट में मौजूद महत्वपूर्ण अस्पष्टताओं और विवादित बिंदुओं की जांच का दायित्व सौंपा गया है।
अरावली पर्वतमाला राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और गुजरात तक फैली हुई है तथा उत्तर भारत के पर्यावरणीय संतुलन में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि अरावली क्षेत्र का वैज्ञानिक सीमांकन नहीं हुआ तो खनन, शहरी विस्तार और अतिक्रमण जैसी गतिविधियां इस संवेदनशील पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक नुकसान पहुंचा सकती हैं। समिति को 31 अगस्त 2026 तक अपनी रिपोर्ट सौंपनी होगी, जिसके बाद भविष्य की पर्यावरणीय नीतियों पर दूरगामी प्रभाव पड़ सकता है।
