भृगु ऋषि की मिथकीय कथा से माइटोकॉन्ड्रिया तक : क्या एक मिथक में छिपा है शक्ति का विज्ञान?

गौतम चौधरी हिन्दू धार्मिक परंपरा की अनेक कथाएँ ऐसी हैं, जिन्हें केवल मिथकीय आख्यान मानकर छोड़ देना उनके अर्थ को सीमित कर देना होगा। इन

झारखंड बना देश का हेल्थ-लैब : पांच बीमारियों से लड़ने के लिए एक व्यवस्था, देश के लिए बन सकता है मॉडल

गौतम चौधरी झारखंड की पहचान लंबे समय तक खनिज, जंगल, पहाड़ और जनजातीय जीवन से जुड़ी रही है। स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी राज्य की

जंतर-मंतर का CJP प्रदर्शन : जब पुलिस की डिजिटल नजर पर ही उठ गए सवाल

गौतम चौधरी जंतर-मंतर पर जुलाई में हुआ Cockroach Janta Party (CJP) से जुड़ा छात्र प्रदर्शन अब केवल एक राजनीतिक आंदोलन या पुलिस कार्रवाई का मामला

पारंपरिक चिकित्सा पर शोध बढ़ाएगा डब्ल्यूएचओ, भारतीय चिकित्सा पद्धति को मिल सकती है संजीवनी

पुनीत उपाध्याय अब पारंपरिक चिकित्सा का उपयोग कर इलाज को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक ऐसी पहल की है जिसका लाभ दुनियाभर के

क्या सचमुच दुनिया तीसरे महायुद्ध की ओर बढ़ रही है?

गौतम चौधरी इतिहास अपने आपको हूबहू दोहराता तो नहीं, मगर उसके संकेत कई बार पुराने दौर की याद जरूर दिलाते हैं। आज दुनिया जिस दौर

नवंबर में भारत आ सकते हैं बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान, दिल्ली-ढाका में तारीखों पर बातचीत

‘‘शेख हसीना के प्रत्यर्पण के मुद्दे के बीच संबंध सुधारने की कोशिश’’ नयी दिल्ली/ भारत और बांग्लादेश अपने द्विपक्षीय संबंधों को फिर से पटरी पर

झारखंड भाजपा में सन्नी टोप्पो की नियुक्ति : आदिवासी नेतृत्व की बदलती दिशा पर उठे सवाल

“सन्नी को लेकर आरएसएस विचार परिवार के कई संगठनों में असहजता““चर्चा में झारखंड प्रांत प्रचार के नाराजगी की खबर“ गौतम चौधरी की खास रपट बाहर-बाहर

आज डिजिटल फ्रैंडली होना पर्याप्त नहीं, जिम्मेदार डिजिटल नागरिक बनना जरूरी है

’’एक सतत भविष्य के लिए तकनीक से अधिक जरूरी है डिजिटल नैतिकता’’ गौतम चौधरी दुनिया तेजी से डिजिटल हो रही है। मोबाइल फोन अब केवल

अर्थव्यवस्था/ प्रवासी भारतीयों से विदेशी मुद्रा की अपील आर्थिक मजबूती या फिर मजबूरी के संकेत?

गौतम चौधरी हाल ही में केंद्रीय वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रवासी भारतीयों से भारत में अधिक निवेश और विदेशी मुद्रा प्रवाह बढ़ाने का आह्वान किया।

सरमद : अधूरे कलमे का फकीर, जिसके सामने सत्ता भी कठघरे में खड़ी थी

गौतम चौधरी इतिहास में कुछ मौतें केवल मौतें नहीं होतीं। वे अपने समय की सत्ता, समाज और धर्म के सामने ऐसे प्रश्न खड़े कर जाती

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