वेदव्यास आज के भारत में महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू ही दो ऐसे नाम हैं जिनके बारे में बच्चे बूढ़े कुछ न कुछ जरूर
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जारी है गरिमा और बुनियादी अधिकारों की लड़ाई
कुमार कृष्णन बिहार के वैशाली में एक सेप्टिक टैंक के भीतर एक ही परिवार के चार सदस्यों की मौत हो गयी। छत्तीसगढ़ के रायपुर में
डराने-धमकाने की प्रशासनिक कार्यशैली लोकतांत्रिक शैली के लिए बेहद खतरनाक
धीतेन्द्र कुमार शर्मा राष्ट्रीय कार्यक्रमों में तैनात कार्मिकों को धमकाना शायद हमारे प्रशासनिक तंत्र की फितरत ही बन गई है। कुछ माह पहले राजस्थान समेत
वामपंथ/ कॉकरोच जनता पार्टी : जनअसंतोष, व्यंग्य और विकल्पहीनता की राजनीति
गायत्री भारद्वाज सर्वोच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत द्वारा बेरोज़गार युवाओं के लिए कथित तौर पर “कॉकरोच” शब्द के प्रयोग के बाद देशभर में
विश्लेषण : आध्यात्मिकता की कसौटी पर रोटी, धर्म और मानवता
गौतम चौधरी सभ्यता के इतिहास में मनुष्य ने सबसे पहले ईश्वर को नहीं, अपितु अन्न खोजा था। भूख मनुष्य का पहला दर्शन है और रोटी
बढ़ती उम्र से प्यार करने का अलग ही आनंद है
उषा जैन ’शीरीं‘ मौत से पहले मर जाने की गलती न जाने कितने लोग नादानीवश करते हैं। काश कोई उन्हें समझा पाता कि यूं सब
अपने लिवर का ध्यान रखने का बढ़िया तरीका
अशोक गुप्त लिवर हमारे शरीर के सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह 24 घंटे कार्य करता रहता है और इसमें अपने को स्वयं
ब्रिटेन से लौट रही भारतीय विरासत, जैन पांडुलिपियों की ऐतिहासिक घर-वापसी
ज्योति जैन भारत की पहचान केवल उसकी भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि उसकी समृद्ध संस्कृति, ज्ञान परंपरा और ऐतिहासिक धरोहरों में है। सदियों पुरानी पांडुलिपियां,
समुद्र से सरहद तक : RSS के सरकार्यवाह होसबले की नसीहत और भारत की आसन्न कूटनीतिक रणनीति
गौतम चौधरी दक्षिण एशिया की राजनीति में कई बार वास्तविक परिवर्तन सरकारी घोषणाओं से नहीं, बल्कि भूगोल, व्यापार और बाज़ार की हलचलों से दिखाई देने
डॉक्टर बनने का सपना था/ नीट-यूजी विवाद के बीच लातूर की छात्रा की मौत ने खड़े किए बड़े सवाल
लातूर/ महाराष्ट्र के लातूर से आई एक खबर ने पूरे देश को झकझोर दिया है। एक किसान परिवार की 18 वर्षीय बेटी, जो डॉक्टर बनने
