नाना पाटेकर : एक सामान्य कलाकार का संघर्ष से शिख़र तक का सफर

संतोष कुमार तिवारी मुंबई की चमक-दमक और फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से अलग अपनी पहचान बनाने वाले अभिनेता नाना पाटेकर का जीवन संघर्ष, संवेदनशीलता, सादगी

वनाधिकार कानून : कागज पर हक, जमीन पर इंतजार

कुमार कृष्णन जंगल को बचाने वाली पीढ़ियां आज अपने ही जंगल पर अधिकार साबित करने के लिए सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट रही हैं। जिन

पड़ताल : भारतीय लोकतंत्र के मानकों के बेहद करीब है इस्लामी फ़िक़्ह की व्यापक अवधारणाएं

गौतम चौधरी इस्लामी फ़िक़्ह और भारतीय लोकतंत्र दो अलग विचारधाराओं और व्यवस्थाओं के प्रतिनिधि हैं। इस्लामी फ़िक़्ह का आधार कुरान, हदीस, इज्मा और कियास जैसे

हर बार दर्शकों का दिल जीत लेती हैं तापसी पन्नू

सुभाष शिरढोनकर अभिनेत्री तापसी पन्नू की नेटफ्लिक्स पर रिलीज फिल्म ‘गांधारी’ उम्मीद के मुताबिक प्रभाव नहीं छोड़ सकी, लेकिन फिल्म में तापसी का अभिनय जरूर

जनकपुर धाम : सरहदों से बड़ी संस्कृति

कुमार कृष्णन सीमा रेखाएं देशों को बांटती हैं, संस्कृतियों को नहीं। नक्शे पर खिंची एक रेखा भारत को नेपाल से अलग करती है, लेकिन मिथिला

ज्ञानेश सही हों या गलत, भाजपा क्यों दिख रही उनके साथ?

राजेश श्रीवास्तव विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की प्रक्रिया पर विवाद और दो चुनाव आयुक्तों की ओर से चुनाव आयोग की कार्यशैली पर आपत्ति जताए जाने

सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता का पैमाना अब नामांकन नहीं, सीखने के परिणाम हों

राम शर्मा भारत में स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पिछले दो दशकों में बड़ा बदलाव आया है। कभी चुनौती बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की

फ्लाईदुबई हादसा : एक व्यक्ति का अपराध पूरे धार्मिक समाज की कसौटी नहीं हो सकती

गौतम चौधरी कभी-कभी किसी घटना को लेकर हम खुद के चिंतन के आधार पर अपराधी ढुंढ लेते हैं लेकिन विस्तविक चित्र कुछ और होता है।

90 के दशक में मेकर्स की पहली पसंद थीं, चित्रांगदा सिंह

सुभाष शिरढोनकर हिंदी सिनेमा की जानी-मानी बेहद ग्‍लैमरस एक्‍ट्रेस चित्रांगदा सिंह ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई दिल्ली के लेडी श्रीराम कॉलेज से पूरी की थी।

AI और आतंक का नया युग : जब विचारधारा को मिल जाए मशीन का दिमाग

गौतम चौधरी कृत्रिम मेधा यानी एआई को लेकर अब तक दुनिया की सबसे बड़ी बहस उसके रोजगार, अर्थव्यवस्था और मानवीय सुविधा पर प्रभाव को लेकर

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