सफेद दाग से घबराएं नहीं, धैर्यपूर्वक कराएं उपचार

सफेद दाग से घबराएं नहीं, धैर्यपूर्वक कराएं उपचार

त्वचा हमारे शरीर का सबसे बड़ा अंग है। शरीर पर अचानक सफेद चकत्ते दिखने पर लोग घबरा जाते हैं लेकिन यह कोई अभिशाप नहीं, बल्कि एक चिकित्सकीय स्थिति है। इसका सबसे प्रमुख कारण विटिलिगो है जिसमें त्वचा का रंग बनाने वाली कोशिकाएं मेलानोसाइट्स नष्ट हो जाती हैं। यह बातें होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रूप कुमार बनर्जी ने कही।

संक्रामक नहीं है विटिलिगो
डॉ. बनर्जी ने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विटिलिगो संक्रामक रोग नहीं है। यह छूने, साथ बैठने या भोजन साझा करने से नहीं फैलता। पीड़ित के प्रति भेदभाव रखना गलत है।

क्यों होते हैं सफेद दाग?
इसका कोई एक निश्चित कारण नहीं है। प्रतिरक्षा-तंत्र की गड़बड़ी, आनुवंशिक प्रवृत्ति, त्वचा पर चोट और मानसिक तनाव इसकी वजह हो सकते हैं। हर सफेद दाग विटिलिगो नहीं होता, यह फंगल संक्रमण या पोषण की कमी से भी हो सकता है। इसलिए स्वयं कोई क्रीम लगाने के बजाय चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।

प्रारंभिक लक्षण
त्वचा पर दूधिया सफेद चकत्ते, जो चेहरे, होंठ, हाथ-पैर पर दिख सकते हैं। प्रभावित जगह के बाल सफेद होना और धीरे-धीरे दागों का बढ़ना।

उपचार में धैर्य जरूरी
डॉ. बनर्जी ने बताया कि विटिलिगो का उपचार समय लेता है। 2-4-6 महीने में परिणाम न मिलने पर घबराएं नहीं और बार-बार डॉक्टर न बदलें। योग्य चिकित्सक की देखरेख में उपचार को पर्याप्त समय दें।

मानसिक स्वास्थ्य पर असर
चेहरे पर दाग होने से आत्मविश्वास कम होता है। परिवार को चाहिए कि रोगी का मनोबल बढ़ाए। पर्याप्त नींद, योग, ध्यान और सकारात्मक संवाद से तनाव कम करें।

आहार और सावधानी
कोई विशेष भोजन इलाज नहीं है, लेकिन संतुलित आहार जरूरी है। हरी सब्जियां, फल, दालें, प्रोटीन और पर्याप्त पानी लें। बिना जांच के सप्लीमेंट न लें। सफेद दाग वाली त्वचा में धूप से जलन का खतरा ज्यादा रहता है, इसलिए तेज धूप में कपड़ों और सनस्क्रीन का उपयोग चिकित्सकीय सलाह से करें।

होम्योपैथिक दृष्टिकोण
होम्योपैथी में केवल त्वचा के लक्षण नहीं, बल्कि रोगी की पूरी शारीरिक, मानसिक स्थिति और पारिवारिक इतिहास देखकर दवा का चयन किया जाता है। योग्य होम्योपैथिक चिकित्सक से धैर्यपूर्वक उपचार कराने पर सकारात्मक परिणाम की पूरी संभावना रहती है।

क्या न करें
तेज क्रीम, स्टेरॉयड या घरेलू नुस्खों से त्वचा को न जलाएं। इंटरनेट देखकर दवा न बदलें। रोगी से दूरी न बनाएं। डॉ. बनर्जी ने कहा कि सफेद दाग त्वचा का रंग बदल सकता है, लेकिन व्यक्ति का व्यक्तित्व और प्रतिभा नहीं। भ्रांतियां दूर कर सम्मान और संवेदनशीलता का व्यवहार करें।

(अदिति फीचर्स)

लेखक होमियोपैथिक चिकित्सक हैं बावजूद इसके किसी अच्छे चिकित्सक की राय के बिना चिकित्सा चिकित्सकीय सिद्धांत के खिलाफ है। इसलिए किसी अच्छे होमियोपैथिक चिकित्सक से संपर्क करने के बाद ही चिकित्सा प्रारंभ करें। वैसे लेखक के चिंतन और विचार से जनलेख प्रबंधन का कोई सरोकार नहीं है।

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