लोकतंत्र में कानून की विश्वसनीयता समानता से बनती है, चयनात्मकता से नहीं

गौतम चौधरी लोकतंत्र की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि उसे सबसे अधिक क्षति उसके घोषित शत्रुओं से नहीं, बल्कि उसके घोषित रक्षकों से भी

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