मुसलमान क्या अपनी आधी आबादी की उपेक्षा कर समाज को समुन्नत बना सकते?

गौतम चौधरी सच पूछिए तो इस्लाम में मर्द और औरत के बीच कोई भेदभाव नहीं है। इस्लामिक साहित्यों में इस बात की मुकम्मल चर्चा की

इतिहास की सशक्त मुस्लिम महिलाएं, जिन्होंने समाज को मजबूत किया

गौतम चौधरी इस्लाम का जैसे ही नाम आता है तो महिलाओं के उत्पीड़न का चित्र उभर कर सामने आ जाता है। दरअसल, यह कपोल कल्पना

समाज में लैंगिक समानता सुनिश्चित करने में मीडिया की भूमिका अहम : नफीसा

पटना/ समाज में जेंडर इक्विालिटी (लैंगिक समानता) को बढ़ावा देने के लिए पॉलिसी बनानेवाले से लेकर परिवार के सदस्यों तक सबकी बराबर की जिम्मेदारी है।

जो समाज महिलाओं का सम्मान करे उसी को सभ्य माना जाए

समाचार मीमांसा  गौतम चौधरी  दरअसल, आज मैं एक समाचार की मीमांसा के लिए प्रस्तुत हुआ हूं। इन दिनों ‘दैनिक भास्कर’ अखबार ही पढ़ रहा हूं।

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