कॉक्रोच जनता पार्टी : लाशों के मंच पर जीत का जश्न

कॉक्रोच जनता पार्टी : लाशों के मंच पर जीत का जश्न

गिद्धों का भी एक धर्म होता है, वो जिंदा जानवरों का मांस नहीं खातीं। वह प्रतीक्षा करती हैं उसके मरने की और प्राण छोडऩे के बाद ही लोथड़ों को नोचती हैं। लेकिन आज का इंसान गिद्ध से भी ज्यादा विभत्स हो गया लगता है। नीट पेपर लीक को लेकर देश भर में प्राण गंवाने वाले 21 युवाओं के पोस्टर लगा कर दिल्ली के जंतर मंतर पर धरना देने वाली कॉक्रोच जनता पार्टी के नेता इन युवाओं का शोक मनाना तो दूर बल्कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के तुरंत बाद फाईव स्टार होटलों में कुल्हे मटकाते और बोतलों के ढक्कन खोलते दिखे।

पेपर लीक मामले में केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का त्यागपत्र हो गया और लगभग एक महीने से दिल्ली के जंतर मंतर पर लोकतंत्र की नई-नई रखवाली कॉक्रोच जनता पार्टी का धरना भी खत्म हो गया पर दो दिनों के भीतर ही इन नए नवेले लोकतंत्र के रखवालों का असली चेहरा सामने आने लगा है। नीट पेपर लीक होने के आक्रोश में मारे गए जिन युवाओं के पोस्टर लगा कर कोहराम मचाने वाली काक्रोच जनता पार्टी के नेताओं ने इतना तमाशा किया वो अपने साथियों को भूखे मरता छोड़ खुद फाईव स्टार होटलों में ठुमके लगाते और बीयर पार्टी करते हुए दिखाई दिए। लाशों के मंच पर लग रहे ठुमके और उड़ रही शराब की दुर्गंध इस बात की साक्षी है कि इस तरह की हरकत करने वालों के मनों में कितनी सड़ांध भरी होगी।

केवल आम जनता ही नहीं बल्कि खुद सीजेपी के आंदोलन से जुड़े लोगों ने इसे शर्मनाक बताया है। सीजेपी के मंच पर भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने वायरल वीडियो को लेकर कहा है कि जीत के साथ विनम्रता भी होनी चाहिए। सोनम ने कहा कि सफलता पाने के साथ-साथ सम्मान और विनम्रता बनाए रखना भी उतना ही जरूरी है। सीजेपी समर्थकों ने भी पार्टी के वीडियो की आलोचना की है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के संस्थापक सदस्य और कमेंटेटर-यूट्यूबर मेघनाद ने सीजेपी नेताओं पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि जब विरोध प्रदर्शन खत्म होने के बाद दर्जनों प्रदर्शनकारी सडक़ों पर बेघर और भूखे रह गए थे तब ये नेता पार्टी कर रहे थे। इंस्टाग्राम पोस्ट में मेघनाद ने कहा कि उन्होंने और कुछ अन्य लोगों ने उन दर्जनों प्रदर्शनकारियों के लिए यात्रा और भोजन का इंतजाम किया जो सीजेपी नेताओं के साथ एक महीने से ज्यादा समय से जंतर-मंतर पर डेरा डाले हुए थे। मेघनाद ने सीजेपी पार्टी के वीडियो के बारे में लिखा, ‘मैं यह सुबह 4 बजे देख रहा हूं। मैंने और कुछ लोगों ने पिछले दो दिनों में अपने पैसे से सीजेपी के उन वॉलंटियर्स और प्रदर्शनकारियों को घर भेजा है जिन्हें बेसहारा और भूखा छोड़ दिया गया था।

मैं कुछ नहीं कहने वाला था लेकिन मैंने यह वीडियो देखा और मुझे बहुत गुस्सा आ रहा है।’ उन्होंने सीजेपी के लिए कड़े शब्दों के साथ अपनी पोस्ट खत्म की, ‘जब आप पार्टी कर रहे थे तब दिल्ली में 70 से ज्यादा प्रदर्शनकारी और छात्र भूखे रह गए क्योंकि आपने परवाह न करने का फैसला किया था। बधाई हो सीजेपी आखिरकार आप भी एक और राजनीतिक पार्टी बन ही गए।’

ऐसा शायद पहली बार हुआ है कि किसी आंदोलन के खत्म होने के दो दिनों बाद ही उसमें फूट पड़ती दिख रही हो। आखिर पड़े भी क्यों ना, कुछ लोगों ने देश के युवाओं के आक्रोश का लाभ उठाया और देखते ही देखते वे दुनिया में अभियानवादियों के स्टार बन गए। उनकी कही बातें अब इंटरनैशनल मीडिया में गूंज रही हैं और उनकी भाव भंगिमा ऐसी है मानो उन्होंने बहुत बड़ा मार्का मार लिया हो। लेकिन क्या फाइव स्टार होटलों में गुलछर्रे उड़ाने वाले जेन-जी नेता बताएंगे कि आंदोलन के दौरान कितनी बार पेपर लीक के मृतकों को याद किया गया।

केंद्रीय मंत्री के इस्तीफे के बाद काक्रोचों ने अहंकारमयी मुद्रा में आकर कहा कि ‘झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए।’ सीजेपी के नेता जीत के जश्न में उन लोगों को क्यों भूल गए जिन्होंने अपनी जानें दीं। उन परिवारों को क्यों नहीं बुलाया गया जिन्होंने अपने बच्चों को खोया। असल में कुछ अभियानवादियों ने इन 21 युवाओं की लाशों का मंच की तरह उपयोग किया और अपना कद बड़ा कर चलते बने। कहने को ये जेन-जी वाले शिक्षा नीति में सुधार का नारा लेकर आए थे परंतु इनका असली नारा यही दिखता है कि ‘अपना काम है बनता-भाड़ में जाए जनता।’ ऐसे मुर्दाखोर आंदोलनकारियों पर तो शायद गिद्धों को भी शर्म आ जाए।

लेखक पंजाब राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की पत्रिका पथिक संदेश के संपादक टोली के सदस्य हैं। आलेख में व्यक्त विचार आपके निजी हैं। इससे जनलेख प्रबंधन का कोई सरोकार नहीं है।

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