नयी दिल्ली/ दिल्ली नगर निगम (MCD) के नये आयुक्त के रूप में वरिष्ठ IAS अधिकारी संजीव खिरवार की नियुक्ति के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में एक बार फिर बहस तेज हो गई है। एक ओर सरकार और प्रशासन इसे अनुभवी अधिकारी की वापसी बता रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर 2022 के चर्चित “त्यागराज स्टेडियम विवाद” की यादें फिर ताज़ा होने लगी हैं।
संजीव खिरवार AGMUT कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी हैं और दिल्ली सहित कई प्रशासनिक इकाइयों में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ निभा चुके हैं। हाल ही में उन्हें राजधानी के सबसे बड़े शहरी निकाय — दिल्ली नगर निगम — का आयुक्त नियुक्त किया गया। यह पद राजधानी की सफाई व्यवस्था, संपत्ति कर, शहरी आधारभूत ढांचे, पार्कों, प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाओं और मानसून प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ा हुआ है।
पुराना विवाद फिर चर्चा में
खिरवार का नाम वर्ष 2022 में राष्ट्रीय स्तर पर तब सुर्खियों में आया था, जब मीडिया में यह आरोप सामने आया कि दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम में खिलाड़ियों को शाम की ट्रेनिंग समय से पहले समाप्त करनी पड़ती थी ताकि अधिकारी दंपत्ति अपने पालतू कुत्ते के साथ स्टेडियम में टहल सकें।
यह मामला सामने आने के बाद विपक्षी दलों और खेल समुदाय ने इसे “वीआईपी संस्कृति” का उदाहरण बताते हुए आलोचना की थी। विवाद बढ़ने पर केंद्र सरकार ने उनका तबादला लद्दाख कर दिया था। हालांकि उस समय खिरवार की ओर से कहा गया था कि तथ्यों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया।
वापसी को लेकर मिश्रित प्रतिक्रियाएँ
अब, लगभग चार वर्ष बाद दिल्ली में उनकी वापसी को लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं। प्रशासनिक हलकों में इसे अनुभवी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति माना जा रहा है, जबकि आलोचक इसे जवाबदेही के प्रश्न से जोड़कर देख रहे हैं।
सोशल मीडिया पर कई लोगों ने सवाल उठाया कि क्या विवादों में रहे अधिकारियों की पुनः महत्वपूर्ण पदों पर नियुक्ति सही संदेश देती है। वहीं कुछ लोगों का तर्क है कि किसी अधिकारी का मूल्यांकन उसके वर्तमान कामकाज और प्रशासनिक क्षमता के आधार पर होना चाहिए।
MCD के सामने बड़ी चुनौतियाँ
दिल्ली नगर निगम इस समय कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रहा है। राजधानी में मानसून पूर्व नालों की सफाई, कूड़ा प्रबंधन, लैंडफिल साइटों का संकट, डेंगू-मलेरिया की आशंका और वित्तीय दबाव जैसे मुद्दे निगम प्रशासन के सामने बड़ी परीक्षा माने जा रहे हैं।
सूत्रों के अनुसार, नए आयुक्त ने कार्यभार संभालने के बाद सफाई व्यवस्था, फील्ड निरीक्षण और मानसून तैयारी की समीक्षा बैठकों को प्राथमिकता दी है। अधिकारियों को समयबद्ध कार्रवाई के निर्देश भी दिए गए हैं।
प्रशासन बनाम जनधारणा
संजीव खिरवार की नियुक्ति एक बार फिर उस पुराने प्रश्न को सामने लाती है कि क्या किसी अधिकारी की सार्वजनिक छवि उसके प्रशासनिक करियर को स्थायी रूप से प्रभावित करनी चाहिए, या फिर शासन व्यवस्था को अनुभव और कार्यकुशलता को प्राथमिकता देनी चाहिए।
संजीव खिरवार को लेकर सोशल मीडिया पर भी बहस होने लगी है। कई यूजर इस बात को लेकर नाराज दिख रहे हैं कि खिरवार जैसे अधिकारी सामंती मानसिकता के हैं और उन्हें फिर से सरकार बड़ी जिम्मेदारी सौंप कर लोकतंत्र का मजाक उड़ा रही है। हालांकि कुछ यूजर अपने पेज पर यह भी लिख रहे हैं कि खिरवार एक सफल अधिकारी हैं। उन्हेंने कई अच्छे भी काम किए हैं।
फिलहाल, दिल्ली की जनता की नजर इस बात पर रहेगी कि नगर निगम की नई टीम राजधानी की जमीनी समस्याओं से कितनी प्रभावी ढंग से निपट पाती है।
