36 वर्ष बाद भी कश्मीरी हिंदुओं को न्याय का इंतज़ार

गजेन्द्र सिंह जब भी भारत में कश्मीर की चर्चा होती है, बहस प्रायः सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा, बहुसंख्यक कश्मीरी मुसलमानों के अधिकारों और अंतरराष्ट्रीय राजनीति

रामानुजाचार्य : विशिष्टाद्वैत के आचार्य और सामाजिक समरसता के अग्रदूत

#वृतांतों की #यात्रा : #संन्यास बड़ा या #गृहस्थ? अक्षपाद् गौतम भारतीय दार्शनिक परंपरा में आदि शंकराचार्य, रामानुजाचार्य और मध्वाचार्य को वेदांत के तीन प्रमुख स्तंभ

इतिहास के मौन नायक : क्या मुंगेरी लाल जी को उनका उचित स्थान मिला?

गौतम चौधरी इतिहास केवल उन लोगों का नहीं होता जिनके नाम पर स्मारक बनते हैं, बल्कि उन लोगों का भी होता है जिनके विचार और

एडिनबर्ग में सुश्रुत की प्रतिमा : प्राचीन भारतीय विज्ञान की आधुनिक प्रतिष्ठा

गौतम चौधरी गत 19 जून को Royal College of Surgeons of Edinburgh के ऐतिहासिक परिसर में महर्षि Sushruta की कांस्य प्रतिमा की स्थापना केवल एक

सारिपुत्र से नालंदा तक : भारत की वह ज्ञान-परंपरा जिसे हमें याद रखना होगा

गौतम चौधरी बिहार के नालंदा के खंडहरों में घूमते हुए अधिकांश लोग ईंट-पत्थरों, स्तूपों और टूटी हुई दीवारों को देखते हैं। कुछ लोग वहाँ प्राचीन

शाण्डिल्य से सूफ़ी तक : प्रेम, अध्यात्म और साम्राज्य के बीच एक आलोचनात्मक संवाद

गौतम चौधरी मानव सभ्यता के आध्यात्मिक इतिहास में प्रेम एक ऐसा सूत्र है जो विभिन्न संस्कृतियों, भाषाओं और धर्मों को अदृश्य रूप से जोड़ता है।

वह इथिपियाई गुलाम जो न केवल दक्कन में स्वदेशी शासन की नीब रखाी अपितु मराठा सल्तनक का बुनियाद भी बना

गौतम चौधरी भारतीय इतिहास में कुछ ऐसे व्यक्तित्व हैं जिनका योगदान अत्यंत महत्वपूर्ण होने के बावजूद उन्हें वह स्थान नहीं मिला, जिसके वे वास्तवक हकदार

भारत का वह एतिहासिक द्वीप जहां से यूरोपीय साम्राज्यवाद की शुरुआत हुई

प्रवीण झा इतिहास में कुछ घटनाएँ ऐसी होती हैं जो देखने में मामूली लगती हैं, लेकिन उनके दूरगामी परिणाम सदियों तक दिखाई देते हैं। 1498

अहिल्याबाई होल्कर : सत्ता नहीं, सेवा की विरासत से लेकर लोकमाता तक का सफर

गौतम चौधरी भारतीय इतिहास में अनेक राजा और महाराजा हुए जिन्होंने अपने साम्राज्य का विस्तार किया, युद्ध जीते और सत्ता का प्रदर्शन किया। लेकिन कुछ

दुराग्रह से प्रायोजित बहस, जवाहर लाल नेहरू के योगदान को कम कर सकती है?

वेदव्यास आज के भारत में महात्मा गांधी और जवाहर लाल नेहरू ही दो ऐसे नाम हैं जिनके बारे में बच्चे बूढ़े कुछ न कुछ जरूर

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