भारतीय ज्ञान परंपरा के वाहक और ‘‘भामती’’ ग्रंथ के रचयिता, महान दार्शनिक वाचस्पति मिश्र

गौतम चौधरी भारतीय दर्शन की परंपरा में कुछ नाम ऐसे हैं, जिनके जीवन और कृतित्व में ज्ञान, तप और मानवीय संवेदना का अद्भुत संगम दिखाई

22 अप्रैल 1870 को जन्मे महान दार्शनिक लेनिन की जयंती पर विशेष/ वैज्ञानिक समाजवाद के संस्थापक : महान लेनिन

सरदूल सिंह दुनिया के महान दार्शनिक और वैज्ञानिक समाजवाद के निर्माताओं को जब याद किया जाता है तो महान लेनिन का नाम सबसे अग्रणी और

बिहार की कोकिला : लोकस्मृति में अमर विंध्यवासिनी देवी

रजनी चौधरी भारतीय लोकसंस्कृति की असली ताक़त उसकी जड़ों में बसती है, गाँवों की मिट्टी, लोकभाषाओं की मिठास और पीढ़ियों से चली आ रही परंपराओं

कुमारिल भट्ट : भारतीय चिंतन और मौन परंपरा के महान शिल्पकार

गौतम चौधरी भारतीय बौद्धिक परंपरा में कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी उपस्थिति शोर नहीं करती, परंतु उनका प्रभाव युगों तक बना रहा है। कुमारिल

व्यापार से साम्राज्य तक : ईस्ट इंडिया कंपनी के उत्थान और भारत के विघटन की कहानी

गौतम चौधरी सत्रहवीं शताब्दी में जब ईस्ट इंडिया कंपनी भारत के तटों पर पहुँची, तब वह किसी विजेता की मुद्रा में नहीं, बल्कि एक विनम्र

जेरूसलम : इतिहास, मिथक, आस्था और राजनीति के बीच उलझा सच

रजनी राणा चौधरी जेरूसलम केवल एक शहर नहीं, बल्कि इतिहास, आस्था और राजनीतिक आकांक्षाओं का ऐसा संगम है, जिसने सदियों से मानव सभ्यता को प्रभावित

पत्थरों में दर्ज सभ्यता की भाषा : ब्राज़ील के Ingá Stone से लेकर भारत के हजारीबाग तक फैली है प्राचीन विरासत

गौतम चौधरी मानव की प्राचीन से प्राचीनतम सभ्यताओं ने अपने विचारों, आस्थाओं और अनुभवों को व्यक्त करने के लिए जिस सबसे स्थायी माध्यम को चुना,

हज़रत ख़्वाजा ज़िया अल-दीन नख़्शबी : सूफ़ी परंपरा के एक महान संत और इस्लामिक तत्ववेत्ता

गौतम चौधरी मध्यकालीन भारतीय इतिहास के सांस्कृतिक व धार्मिक परिदृश्य में कुछ ऐसे व्यक्तित्व उभरते हैं, जिन्होंने सीमाओं, भाषाओं और परंपराओं को लाँघकर एक नए

कहीं मध्य एशिया की सर्प जाति का सांस्कृतिक विस्तार तो नहीं भारत की नाग सभ्यता?

गौतम चौधरी इतिहास और मिथक के बीच की रेखा अक्सर धुंधली होती है, लेकिन इसी धुंधले अवशेषों में सभ्यताओं की आत्मा छिपी रहती है। फ़ारसी

कौटिल्य का अर्थशास्त्र : जनता की सेवा में निहित है राज्य की शक्ति

गौतम चौधरी भारतीय चिंतन परंपरा में पुरुषार्थ चतुष्टय-धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष का विशेष महत्व है। इनमें “अर्थ” को अत्यंत केंद्रीय स्थान प्राप्त है, क्योंकि

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